द जनमित्र डेस्क
परंपरागत खेती में ज्यादा मेहनत के बावजूद कम मुनाफा देख बक्सर जिले के एक किसान ने पपीते की खेती को अपनी आय का मुख्य आधार बना लिया है। चक्की प्रखंड के अरक गांव निवासी विनोद सिंह ने साल 2022 में महज एक एकड़ जमीन पर पपीते के पौधे लगाए थे। अच्छी पैदावार और बेहतर आमदनी मिलने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खेती का विस्तार किया और अब आठ एकड़ में पपीता उगा रहे हैं।

विनोद सिंह बताते हैं कि पारंपरिक फसलों के साथ पपीते की खेती का प्रयोग उन्होंने आय बढ़ाने के मकसद से शुरू किया था। सबसे पहले उन्होंने कृषि विभाग से संपर्क किया। विभाग की सलाह और प्रोत्साहन मिलने के बाद उन्होंने एक एकड़ में पौधे लगाए। कम लागत में अच्छी कमाई होने से उनका हौसला बढ़ा और उन्होंने रकबा बढ़ाते हुए साल 2026 तक खेती को आठ एकड़ तक पहुंचा दिया।
किसान के अनुसार पपीते की खेती में प्रति एकड़ करीब एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है, जबकि चार से पांच लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है। इस आमदनी ने उन्हें खेती को नए अंदाज में करने के लिए प्रेरित किया। फसल तैयार होने के बाद बाजार की भी कोई खास दिक्कत नहीं होती। व्यापारी खुद खेत पर पहुंचकर फल खरीद लेते हैं और वहीं से तुड़ाई कर ले जाते हैं। इससे किसानों को उपज बेचने के लिए अलग से बाजार खोजने की जरूरत नहीं पड़ती।
विनोद सिंह के मुताबिक फरवरी-मार्च में पौधारोपण करने पर अक्टूबर तक फल आने लगते हैं। हालांकि पैदावार किस्म, मौसम और फसल प्रबंधन पर भी निर्भर करती है। पपीते की खेती के लिए खेत में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था बेहद जरूरी है क्योंकि पानी जमा होने से पौधे खराब हो सकते हैं। इसलिए पौधारोपण से पहले खेत की स्थिति और जल निकासी का ख्याल रखना चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से खेती और नियमित देखभाल से अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है।
आठ एकड़ में लगी पपीते की फसल अब आसपास के किसानों का भी ध्यान खींच रही है। दूसरे किसान विनोद सिंह के खेत पर पहुंचकर पौधारोपण, फसल प्रबंधन और खेती के तरीकों की जानकारी ले रहे हैं।

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