द जनमित्र डेस्क
बक्सर। स्थानीय सदर अस्पताल में इलाज की खराब व्यवस्था को लेकर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन को स्पष्टीकरण तलब किया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो ने नोटिस में अस्पताल प्रशासन से पूछा है कि आखिर किन हालात में हड्डी रोग विशेषज्ञ की सेवा दो घंटे तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।



सूत्रों के मुताबिक 30 अक्टूबर को व्यवहार न्यायालय की उच्च वर्गीय लिपिक आरती कुमारी सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। पैर में गंभीर चोट और सूजन के कारण वे काफी दर्द में थीं। न्यायालय के दो कर्मचारी सुनील कुमार और संतोष कुमार उन्हें सदर अस्पताल ले गए। करीब साढ़े दस बजे सरकारी पर्ची कटवाकर इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर को दिखाया गया और एक्स-रे भी कराया गया। इसके बाद उन्हें हड्डी विशेषज्ञ के चैंबर नंबर 13 में भेजा गया, लेकिन वहां ताला लगा मिला। स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर अभी आए नहीं हैं।
जख्मी कर्मचारी के साथ गए दोनों कर्मी सिविल सर्जन, डिप्टी सर्जन और ईएमओ कार्यालय भी गए, लेकिन वहां भी कोई अधिकारी नहीं मिला। इसके बाद स्वयं जज अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन से बात की और इलाज सुनिश्चित कराने का आश्वासन लिया। इसके बावजूद दोपहर 12 बजे तक कोई इंतजाम नहीं हो सका। बढ़ते दर्द और सूजन के चलते मरीज को अस्पताल परिसर में ही डॉ. विकास पांडेय के निजी क्लिनिक महामाया में ले जाना पड़ा, जहां प्लास्टर कराने में करीब दस हजार रुपये खर्च हुए।
जज ने अपने पत्र में लिखा है कि जब न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी लगातार संपर्क करने के बावजूद दो घंटे तक एक न्यायालय कर्मी का इलाज नहीं हो पाया, तो आम नागरिकों की जांच-पड़ताल का स्तर क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने सिविल सर्जन से कारण बताओ नोटिस मांगते हुए यह भी पूछा है कि क्यों न इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को सूचित किया जाए।
इस बीच बक्सर सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि कोर्ट की महिला कर्मचारी को हड्डी डॉक्टर से दिखाने के लिए कॉल जरूर आया था, लेकिन स्पष्टीकरण वाला नोटिस अभी उनके पास नहीं पहुंचा है।




