द जनमित्र डेस्क
गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के पैकेज-1 के 34 किलोमीटर खंड पर एक अक्टूबर से ट्रायल शुरू हो चुका है। अब सबसे ज्यादा ध्यान पैकेज-4 यानी 17.27 किलोमीटर लंबे बक्सर स्पर पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आजमगढ़ परियोजना निदेशक पीयूष अग्रवाल ने बताया कि दिसंबर तक बक्सर फेज को भी चालू करने की कोशिश की जा रही है। इस स्पर पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे।
बक्सर स्पर करीमुद्दीनपुर क्षेत्र से मुख्य ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़कर भरौली होते हुए बक्सर में गंगा पुल के संपर्क मार्ग तक पहुंचेगा। इसकी लंबाई 17.270 किलोमीटर और अनुमानित लागत करीब 617.89 करोड़ रुपये है। मूल रूप से इसे 14 जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
अभी तक बक्सर स्पर में 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके बनने से आजमगढ़, अयोध्या, लखनऊ और दिल्ली की तरफ जाने में करीब 15 किलोमीटर दूरी और लगभग 45 मिनट का समय बचेगा।
अभी बक्सर से गाजीपुर-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले वाहनों को भरौली, कुंडेसर और भांवरकोल इलाके के पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर निर्भर रहना पड़ता है। संकरे हिस्से और भारी मालवाहक ट्रैफिक के कारण यहां अक्सर लंबा जाम लगता है। कभी-कभी निकलने में कई घंटे भी लग जाते हैं। नया स्पर तैयार होने पर बक्सर से आने वाला यातायात सीधे मुख्य ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तक पहुंच सकेगा और पुराने रास्ते पर दबाव घटेगा।
सड़क का मुख्य हिस्सा तैयार हो चुका है। करीमुद्दीनपुर के पास करीब 205 मीटर लंबे चार लेन रेल ओवरब्रिज सहित पुलों के संपर्क मार्ग का काम तेज गति से चल रहा है।
परियोजना की समयरेखा के अनुसार 2022 में पैकेज और डीपीआर स्तर पर स्वीकृति मिली थी। बक्सर स्पर की नियुक्ति 15 जून 2023 को हुई और मूल पूर्णता लक्ष्य 14 जून 2025 रखा गया था।
पूरी योजना में 117.12 किलोमीटर मुख्य ग्रीनफील्ड मार्ग और 17.27 किलोमीटर बक्सर स्पर शामिल हैं। इसे चार पैकेजों में बांटा गया है—हृदयपुर-शाहपुर 42.5 किलोमीटर, शाहपुर-पिंडारी 35.65 किलोमीटर, पिंडारी-रिवीलगंज बाईपास 38.97 किलोमीटर और बक्सर स्पर 17.27 किलोमीटर।
इसके पूरा होने पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सड़क संपर्क का नया नेटवर्क तैयार होगा। पश्चिमी और उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे नेटवर्क से बेहतर जुड़ सकेगा। बक्सर से भोजपुर और आगे पटना की ओर आने-जाने वाले यातायात को लखनऊ-दिल्ली दिशा में तेज मार्ग मिलेगा, जबकि सारण क्षेत्र मुख्य कॉरिडोर के जरिए जुड़ेगा।
बक्सर में गंगा पर तीसरे पुल का निर्माण भी जारी है। फिलहाल दो पुल हैं—एक 1965 में बना पुराना वीर कुंवर सिंह सेतु, जो जर्जर होने के कारण केवल हल्के वाहनों के लिए सीमित है, और दूसरा 2022-23 में शुरू हुआ दो लेन वाला पुल। दोनों तरफ पुल पर वाहन रोककर जांच की व्यवस्था के कारण लगातार जाम लगता है।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पटना इकाई करीब 3.2 किलोमीटर लंबे तीन लेन वाले नए पुल और एलिवेटेड एप्रोच का निर्माण कर रही है। सितंबर 2025 से शुरू हुई इस परियोजना में अब तक करीब 30 प्रतिशत काम हो चुका है। इसे फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

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