रविवार, 25 अक्टूबर 2026
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बेटे ने घर से बाहर निकाला, अब बुजुर्ग को वापस मिला घर

बक्सर के सिमरी में साठ साल से ज्यादा उम्र की अंधी महिला रामदुलारी देवी को प्रशासन की मदद से अपना मकान फिर से मिला। आरोप है कि उनके बेटों ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था और पेंशन की रकम भी अपने पास रख लेते थे।

रविवार दोपहर डुमरांव एसडीएम राजीव कुमार के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई की और महिला को उनके घर का कब्जा सौंप दिया। रामदुलारी देवी दोनों आंखों से बिल्कुल नहीं देख पातीं। उनके पति सरकारी सेवा में थे। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पेंशन मिलने लगी थी।

बेटों पर आरोप है कि उन्होंने मां को घर से निकालकर मकान पर ताला जड़ दिया था। इससे बुजुर्ग महिला बेघर हो गई थीं और रहने की जगह की तलाश में भटक रही थीं। मामले की गंभीरता समझते हुए प्रशासन ने दखल दिया। एसडीएम के आदेश पर सिमरी अंचल अधिकारी भगवती शंकर पांडेय ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की।

पेंशन को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि महिला का एक बेटा बिहार पुलिस में काम करता है। उसने मां की पेंशन के आधार पर लोन ले रखा था। किस्त कटने के बाद हर महीने सिर्फ पांच हजार रुपये बचते थे। वह रकम भी बेटा खुद एटीएम से निकाल लेता था। इन आरोपों पर अभी संबंधित पक्ष का कोई बयान उपलब्ध नहीं है।

प्रशासन की इस पहल के बाद रामदुलारी देवी को दोबारा अपने घर में रहने का हक मिल गया। लंबे समय से परेशान चल रही बुजुर्ग महिला को राहत मिली है। इस घटना ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और उनकी देखभाल का मुद्दा उठाया है। प्रशासन का संदेश साफ है कि बुजुर्ग माता-पिता को घर या अन्य अधिकारों से वंचित करने पर कानून के जरिए मदद ली जा सकती है।

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