द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिले में स्थित ऐतिहासिक चौसा युद्ध मैदान इन दिनों उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार बना हुआ है। यहीं सन् 1539 में अफगान शासक शेरशाह सूरी और मुगल सम्राट हुमायूं के बीच वह महत्वपूर्ण युद्ध हुआ था जिसने तत्कालीन राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया था।

लाखों-करोड़ों रुपये निवेश के बावजूद यह स्थल आज झाड़-झंखाड़ और कचरे से अटा पड़ा है। पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से विकसित किए गए पार्क की हालत इतनी खराब हो गई है कि आसपास के निवासी भी वहां जाने से कतराते हैं।
शुक्रवार को बक्सर की जिलाधिकारी साहिला ने युद्ध मैदान का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने स्थल का चारों ओर घूमकर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और मौजूद अधिकारियों से सुविधाओं, रखरखाव तथा पहुंच मार्ग की स्थिति के बारे में जानकारी ली। साथ ही आवश्यक निर्देश भी जारी किए गए।
इस दौरान चौसा नगर पंचायत के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि काजू मिश्रा, वार्ड पार्षद हृदय नारायण सिंह उर्फ मटर यादव, अशोक सिंह तथा चेयरमैन प्रतिनिधि मनोज यादव सहित कई स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे। उन्होंने जिलाधिकारी को युद्ध स्थल की दुर्दशा और वहां पहुंचने वाली सड़क की समस्याओं से अवगत कराया।
दशकों की उपेक्षा के बाद करीब पांच वर्ष पूर्व मनरेगा योजना के तहत इस मैदान को पार्क के रूप में विकसित किया गया था। उस समय रंग-बिरंगे फूल, सेल्फी पॉइंट और बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था की गई थी। दीवारों पर शेरशाह सूरी, हुमायूं तथा निजाम भिश्ती के चित्र भी उकेरे गए थे।
इसके बाद लगभग दो वर्ष पहले बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने 2.65 करोड़ रुपये की लागत से लैंडस्केपिंग, चारदीवारी, प्रवेश द्वार, टिकट कक्ष और गार्ड रूम का निर्माण करवाया। उद्देश्य था इस ऐतिहासिक स्थान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना जहां टिकट व्यवस्था, सुरक्षाकर्मी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
परंतु खर्च के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया। रखरखाव के अभाव में पार्क में झाड़ियां फैल गईं और गंदगी जमा होती चली गई। जिन सुविधाओं से पर्यटकों को खींचने की उम्मीद थी, वे अब उपेक्षा की मिसाल बनकर रह गई हैं। नियमित सफाई और देखभाल न होने से स्थल वीरान दिखने लगा है।
इतिहास में चौसा का यह मैदान खास महत्व रखता है। 26 जून 1539 को यहां शेरशाह सूरी ने हुमायूं को निर्णायक रूप से पराजित किया था। इस विजय ने शेरशाह के नेतृत्व में सूरी साम्राज्य के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया और उस काल की राजनीतिक दिशा को नया मोड़ दिया।
जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद स्थानीय लोगों में यह आशा जागी है कि प्रशासन अब इस ऐतिहासिक स्थल की दुर्दशा दूर करने तथा इसे फिर से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने के ठोस प्रयास करेगा।

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