द जनमित्र डेस्क
बक्सर में बिजली विभाग की घोर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उपभोक्ता के मकान में ग्यारह साल तक न तो बिजली का तार पहुंचा और न ही मीटर लगाया गया, फिर भी विभाग ने कागजी खपत दिखाकर पैंतालीस हजार रुपये से ज्यादा का बकाया थमा दिया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में बिजली कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है।



इटाढ़ी थाना क्षेत्र के कादीपुर गांव के सोनू कुमार चौबे ने फरवरी दो हजार पंद्रह में अपने पिता त्रिभुवन चौबे के नाम से घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। सिक्योरिटी और सप्लाई चार्ज के रूप में चार सौ पचहत्तर रुपये भी जमा कराए गए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि एक महीने के अंदर मीटर लग जाएगा और बिजली आ जाएगी।
महीनों इंतजार के बाद जब घर में अंधेरा ही रहा तो सोनू बिजली दफ्तर पहुंचे। वहां जूनियर इंजीनियर ने नया खेल शुरू कर दिया। बताया गया कि दो हजार सत्तासी रुपये का बिल बन चुका है। बिना तार और मीटर के बिल कैसे बना, यह पूछने पर जवाब मिला कि कागजों पर कनेक्शन चालू हो चुका है इसलिए पैसा देना पड़ेगा। कनेक्शन की आस में सोनू ने जनवरी दो हजार सोलह में यह राशि भी ऑनलाइन जमा कर दी, लेकिन घर तक लाइन नहीं पहुंची।
ग्यारह साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने और सुधार की अर्जी देने के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। उलटे विभाग ने बिना किसी मीटर के औसत खपत और विलंब शुल्क जोड़ते हुए फरवरी दो हजार पच्चीस तक कुल पैंतालीस हजार इक्यासी रुपये का बिल बना दिया। इसमें अकेले इक्कीस हजार सात सौ अट्ठाईस रुपये लेट फाइन के थे।
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परेशान सोनू ने लोक शिकायत निवारण अधिकारी के पास गुहार लगाई। जांच में सामने आया कि परिसर में सर्विस वायर ही नहीं है और घर पर ताला लटका हुआ है। पंचायत के मुखिया और सरपंच ने भी लिखित में प्रमाणित किया कि उस मकान में कभी बिजली कनेक्शन या मीटर लगा ही नहीं। इसके बावजूद विभाग ने अजीब दलील दी कि उपभोक्ता ने मुकदमा बनाने के लिए खुद मुख्य लाइन से तार हटा लिया था।
आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विभाग की दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि ग्यारह साल में विभाग यह साबित नहीं कर सका कि उसने वास्तव में कब कनेक्शन दिया और इतने लंबे समय तक मीटर क्यों नहीं लगाया। बिना कनेक्शन और मीटर के लगातार भारी सरचार्ज जोड़कर बिल भेजना सेवा में गंभीर खामी है।
आयोग ने आदेश दिया कि बिजली विभाग पैंतालीस दिनों के अंदर नया आवेदन लेकर विधिवत कनेक्शन चालू करे और मीटर लगाए। अब तक जोड़े गए पूरे विलंब अधिभार को माफ कर नियमानुसार नया बिल जारी करे। ग्यारह साल की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के बदले उपभोक्ता को एकमुश्त पांच हजार रुपये का मुआवजा भी दिया जाए।




