द जनमित्र डेस्क
बक्सर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार व चुनाव आयोग की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इस प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की।

मुन्ना तिवारी का आरोप है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची संशोधन में मनमानी बरती गई। उन्होंने कहा कि मैपिंग के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम काट दिए गए, जिससे मताधिकार प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने एसआईआर को पूरी तरह गैरकानूनी बताया और इस पर गंभीर सवाल खड़े किए।
पूर्व विधायक ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति व्यवस्था में हुए बदलाव पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पहले इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की भूमिका होती थी, लेकिन बाद में नियमों में फेरबदल कर दिया गया। इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कम हुई और केंद्र सरकार का दखल बढ़ा। उन्होंने फॉर्म-6 के नियमों में किए गए बदलावों और आयोग के अंदर दर्ज आपत्तियों को भी लेकर सवाल उठाए।
मुन्ना तिवारी ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कुल 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई गंभीर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रहा।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की हालत को लेकर भी हमला बोला। उनका आरोप है कि बिहार विधानसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया में भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की गरिमा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
इस मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रदेश नेता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन, यूथ कांग्रेस नेता शुभम तिवारी, नीलू मिश्र समेत कई अन्य नेता भी मौजूद रहे।

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