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ग्राउंड रिपोर्ट

ऐतिहासिक रूप से समृद्ध शहर बक्सर बना कूड़ों की नगरी

नगर परिषद के आधिकारियों का नया खेल, अब खतीबा में नही बनेगा कूड़ा डंपिंग जोन. सरकारी और रैयती जमीन के खेल में डंपिंग जोन का योजना हुआ फेल.

द जनमित्र | डेस्क

बक्सर : अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध बक्सर एवं डुमराँव का नगर परिषद क्षेत्र अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. आलम यह है कि इस धार्मिक नगरी को अब लोग कूड़ों की नगरी के नाम से पुकारने लगे है. लॉ कॉलेज से लेकर सदर अस्पताल तक, कृषि महाविद्यालय से लेकर टीचर ट्रेनिंग स्कूल तक, शहर की तमाम गंदगी को उठाकर शहर में डंप करने के लिए नप के अधिकारी करोड़ो रुपये प्रत्येक महीने पानी की तरह बहा रहे है. सता बदली शासन बदला, बजट की राशि कई गुणा बढा दी गई उसके बाद भी हालात बद से बदतर है.

डुमराँव में कभी बजती थी शहनाई की धुन, अब महकता है कूड़ा

भारत रत्न से सम्मानित शहनाई के जादूगर के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध उस्ताद विस्मिल्लाह खां ने इस शहर को अपने शहनाई की धुन के बदौलत अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी. लेकिन आज इस शहर के चारो तरफ कूड़े की बड़ी-बड़ी टीला से उठ रहे दुर्गन्ध ने लोगों का जीना दुर्भर कर दिया है. आर्थिक रूप से सम्पन्न इस शहर को अब कूड़ों के शहर के रूप में लोग जानने लगे है.

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राज परिवार से लेकर बीजेपी, कांग्रेस, राजद, जदयू, कम्युनिस्ट पार्टिया रही सत्ता में

डुमराँव के राज घराने से लेकर बीजेपी, कांग्रेस, जदयू, राजद, कम्युनिस्ट, निर्दलीय सहित अन्य पार्टी के नेताओं को इस क्षेत्र की जनता ने गद्दी पर बैठाया लेकिन अपनी जेब भरने के सिवाय एक कूड़ा डंपिंग जोन तक नही बनवा पाए. आलम यह है कि इस शहर में सांस लेने पर लोगों का दम घुटने लगा है. उसके बाद भी सिस्टम कछुए की चाल से चल रहा है.

कूड़े की ढेर से कराह रहा है विश्वामित्र की नगरी

विश्वामित्र की यह पावन नगरी बक्सर त्रेतायुग में भगवान राम का पाठशाला बना और यही से ज्ञान की प्राप्ति की. ऐतिहासिक रूप से समृद्ध इस नगरी को आज कूड़ों की नगरी के नाम से जाना जा रहा है. नगर थाना के सामने ज्ञान के मंदिर की चारो तरफ केवल कूड़ा ही कूड़ा है. जिसके बीच पाठशाला में बैठकर बच्चे पढ़ाई करते है.

कई गुना बढा बजट फीर भी बदहाल है बक्सर

बक्सर नगर परिषद क्षेत्र की बजट 1 अरब 66 करोड़ है. उसके बाद भी 1990 से लेकर आज तक अधिकारी या सांसद, विधायक एक कूड़ा डंपिंग जोन तक नही बना पाए. मीडिया ने जब मामले की तूल दी तो आनन-फानन में इटाढ़ी थाना क्षेत्र के खतीबा गांव में कूड़ा डंपिंग जोन बनाने की बात कही गई, लेकिन अधिकारियो की उदासीनता के कारण निजी और सरकारी भूमि के खेल में यह योजना भी फेल कर गया.

क्या कहते है अधिकारी

कूड़ा डंपिंग जोन के सवाल पर नप के स्वच्छता पदाधिकारी रवि कुमार सिंह ने बताया कि सरकारी और रैयती भूमि विवाद में यह मामला फंस गया है. जिस जगह को चिन्हित किया गया था उसपर किसी ने शिकायत दर्ज करा दी है. फिलहाल इसका विकल्प तलाशा जा रहा है और उस भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जा रही है. वही नप के चेयरमैन पति नियामतुल्लाह फरीदी ने बताया की जमीन उपलब्ध कराना प्रशासन का काम है. उसके बाद नप आगे का काम पूरा करेगा.

गौरतलब है कि साफ-सफाई के नाम पर प्रत्येक साल बक्सर एवं डुमराँव नगर परिषद के अधिकारी करोड़ो रूपये शहर की गंदगी को उठाकर शहर में ही डंप करने के लिए खर्च कर रहे है. कूड़े की ढेर से उठ रहे दुर्गन्ध से लोगो को तरह तरह की बीमारियां हो रही हैं