बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
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बक्सर में पुरुषों में बढ़ रहा हाई ब्लड शुगर का खतरा

जिले के पुरुषों में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 15 साल और उससे अधिक उम्र के करीब 15 फीसदी पुरुषों का ब्लड शुगर 140 एमजी/डीएल से ऊपर पाया गया या वे इसे कंट्रोल करने के लिए दवा ले रहे थे।

पिछले सर्वे एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 11.5 फीसदी था। यानी पांच साल में 3.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। सर्वे में एक और चिंताजनक बात सामने आई है। जिन पुरुषों का ब्लड शुगर 160 एमजी/डीएल से ज्यादा है, उनका अनुपात भी बढ़ा है। एनएफएचएस-6 में ऐसे पुरुष 7.8 फीसदी पाए गए, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 4.5 फीसदी था। इस श्रेणी में 3.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।

141 से 160 एमजी/डीएल के बीच ब्लड शुगर वाले पुरुषों का आंकड़ा लगभग स्थिर रहा। इस बार यह 6.7 फीसदी रहा, जो पिछले सर्वे में 6.6 फीसदी था। आंकड़े साफ बताते हैं कि जिले में न सिर्फ सामान्य रूप से बढ़ा हुआ ब्लड शुगर बढ़ रहा है, बल्कि खतरनाक स्तर वाला हाई ब्लड शुगर भी तेजी से फैल रहा है।

महिलाओं में स्थिति कुछ बेहतर दिखी। महिलाओं में यह आंकड़ा पिछले सर्वे के 12.9 फीसदी से घटकर 12.4 फीसदी रह गया। महिलाओं में 0.5 प्रतिशत अंक की हल्की कमी दर्ज की गई है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े नियमित जांच और समय पर इलाज की जरूरत को रेखांकित करते हैं। हालांकि सर्वे के ये आंकड़े जिले में मधुमेह के कुल मरीजों की सही संख्या नहीं बताते। ब्लड शुगर का एक बार मापा गया स्तर और चिकित्सकीय जांच के आधार पर मधुमेह की पुष्टि दोनों अलग-अलग बातें हैं।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विन्ध्याचल कुमार सिंह बताते हैं कि पिछले पांच साल में ब्लड शुगर बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली बड़ा कारण हो सकती है। शारीरिक मेहनत में कमी, गलत खानपान, मोटापा और तनाव जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। खासकर युवा और कामकाजी पुरुषों में लंबे समय तक बैठकर काम करना, फास्ट फूड का ज्यादा सेवन और नियमित व्यायाम न करना जोखिम बढ़ा रहा है।

डॉक्टर साफ कहते हैं कि एनएफएचएस के आंकड़े बढ़ोतरी के असली कारणों की पुष्टि नहीं करते, बल्कि सिर्फ ब्लड शुगर के बढ़े स्तर की तस्वीर पेश करते हैं। इसलिए लोगों को नियमित जांच, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए, ताकि समय रहते जोखिम पकड़कर सही इलाज शुरू किया जा सके।

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