द जनमित्र | शशि
इन दिनों पूरा जिला गर्मी की आग में झुलस रहा है। लगातार दूसरे दिन पारा 40 डिग्री के पार चला गया। बुधवार को भले ही अधिकतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की हल्की राहत दिखी, लेकिन तेज पछुआ हवाओं ने तपिश को कम होने नहीं दिया। थर्मामीटर ने दिन का अधिकतम तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस के पार दिखाया, जबकि रात का न्यूनतम तापमान लगभग तीन डिग्री की गिरावट के साथ चौबीस डिग्री सेल्सियस पर ठहरा। मौसम साफ रहा, लेकिन सुबह से ही सूरज ने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी। नौ बजे तक धूप तेज हो चुकी थी, और दोपहर आते-आते गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। शाम 4:30 बजे तक सड़कें सुनसान पड़ी थीं। लोग तौलिया, छाता, और जो भी हाथ लगा, उसी से सूरज की तपन से बचने की जद्दोजहद करते नजर आए। गर्म हवाओं ने लू का रूप ले लिया। उष्ण लहर के चलते येलो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।



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गर्मी ने जिंदगी का रंग बदल दिया। पिछले दो दिनों से चल रही हीटवेव ने लोगों की दिनचर्या को उलट-पुलट कर रख दिया। सुबह 10 बजे के बाद लोग घर से बाहर कदम रखने से कतराने लगे हैं। जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकल रहे हैं, वरना दोपहर में सड़कें वीरान हो जा रही हैं। किसान भी धूप से बचने के लिए रबी फसलों की कटाई, दवनी और थ्रेसिंग का काम रात या भोर में निपटा रहे हैं। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि धूप और गर्म हवा से बचें, वरना हीट स्ट्रोक और लू का खतरा सिर पर मंडरा रहा है।
हालांकि मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगला हफ़्ता राहत लेकर आ सकता है। अगले सप्ताह में हल्की बूंदाबांदी के साथ आधिकतम तापमान में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिल सकती है और इसके 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है।
हालांकि फिलहाल के लिए आम लोगो के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ गई है। अप्रैल में ही जब तापमान 42 डिग्री के करीब पहुंच गया, तो मई-जून की कल्पना लोगों को डराने लगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि एसी और कूलर से गर्मी तो कम हो सकती है, लेकिन ये पर्यावरण को और नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका मानना है कि पौधरोपण और कार्बन उत्सर्जन में कटौती ही इस समस्या का असली हल है।
उधर, गर्मी ने बाजार में भी हलचल मचा दी। एसी और कूलर की मांग आसमान छू रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों पर भीड़ लगी है, शो-रूम में एसी की बिक्री जोरों पर है। जो लोग महंगे एसी नहीं ले सकते, वे कूलर से गुजारा कर रहे हैं। गर्मी ने सबको परेशान कर रखा है, लेकिन राहत की उम्मीद अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही।




