द जनमित्र | शशि
बक्सर में मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय की स्थापना दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें पौधे वितरित किए गए, साथ ही मरीजों को गोल्डन कार्ड प्रदान किए गए। यह दिन न केवल उत्सव का प्रतीक बना, बल्कि जागरूकता फैलाने का भी एक माध्यम रहा। डॉक्टर दिलशाद आलम ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि मानवाधिकार और सामाजिक न्याय संगठन समाज में अपना योगदान देने व बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।




उन्होंने वर्तमान समय को ‘उल्टा युग’ करार देते हुए शिक्षा के अभाव पर चिंता जताई। उनके अनुसार, महाविद्यालय, कॉलेज और मेडिकल कॉलेज की स्थापना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। गरीबी के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 15 किलो अनाज से गरीबों का पेट नहीं भर सकता; इसके बजाय, उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है। व्यावसायिक क्षेत्र को बढ़ावा देकर ही गरीबों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। डॉ. आलम ने गरीबों के हक और न्याय की लड़ाई को मजबूती से उठाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि हम समाज के हर तबके के उत्थान के लिए कटिबद्ध है।
सामाजिक बदलाव की बात करते हुए उन्होंने एक और गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला। आज के दौर में वृद्धजन आश्रमों में रहने को मजबूर हैं, जबकि उनके बच्चे विदेशों में बस गए हैं। इस स्थिति में सुधार की सख्त आवश्यकता है। डॉ. आलम ने समाज को इस दिशा में सोचने और कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। उनके इन विचारों और कार्यों के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
इस आयोजन के दौरान ‘पेड़ लगाओ अभियान’ के तहत 50 पेड़ वितरित किए गए, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम न केवल सामाजिक न्याय और मानवाधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करने में सफल रहा, बल्कि यह भी संदेश दे गया कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।




