द जनमित्र डेस्क
जिला के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को अब आपात स्थिति में खून के लिए जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के ब्लड बैंक तक भागना नहीं पड़ेगा। जल्द ही जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रक्त भंडारण की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इन केंद्रों में रक्त सुरक्षित रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि इन जगहों पर रक्त एकत्र नहीं किया जाएगा।



इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पीएचसी व सीएचसी के चिकित्सकों तथा एएनएम को सदर अस्पताल में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अमलेश कुमार ने बताया कि प्रसव संबंधी सभी सेवाएं अब पीएचसी और सीएचसी में ही उपलब्ध हैं। प्रसव या सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान अक्सर रक्त की कमी हो जाती है। समय पर रक्त न मिलने से कई महिलाओं की जान चली जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखकर हर प्रखंड में रक्त भंडारण केंद्र तैयार किए जा रहे हैं।
डॉ. अमलेश ने कहा कि थैलेसीमिया, गुर्दे की बीमारी जैसी अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी अब आसानी से रक्त मिल सकेगा। ये केंद्र न केवल सरकारी अस्पतालों के मरीजों के लिए बल्कि पंजीकृत निजी अस्पतालों के मरीजों के लिए भी उपयोगी होंगे। यहां सिर्फ रक्त वितरित किया जाएगा, संग्रह की कोई सुविधा नहीं होगी। प्रशिक्षण में रक्त को सुरक्षित रखने के तरीके, रक्त कहां से आएगा और पीएचसी ले जाते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना है, जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
प्रशिक्षण सत्र में डॉ. कुमार पंकज, सुनील कुमार, संतोष कुमार, शाहिना शन्सी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक खून की जरूरत पड़ने पर मरीजों को जिला मुख्यालय आना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी हो जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ब्लड सैंपल प्रखंड स्तर पर ही लिया जा सकेगा और जरूरत का रक्त स्थानीय भंडारण केंद्र से उपलब्ध हो जाएगा। इससे समय की बचत होगी और मरीजों को तेजी से इलाज मिल सकेगा। स्वास्थ्य सेवाएं अब जिला मुख्यालय तक सीमित न रहकर सीधे प्रखंड स्तर तक पहुंच जाएंगी, जिससे ग्रामीण मरीजों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।




