डुमराँव अनुमंडलीय अस्पताल के वरिष्ठ नागरिक वार्ड में पिछले 24 घण्टे से पड़ा है बुजुर्ग का लावारिश हालात में बेड पर लाश. बेखबर है अस्पताल प्रशासन, मुर्दे के बीच जिंदा मरीजो का हो रहा है इलाज.
द जनमित्र | डेस्क
बक्सर: जिले का सरकारी अस्पताल पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है. स्वाथ्यकर्मियो के साजिश के जाल में फंसे जिले के बड़े सरकारी अस्पताल से लेकर अनुमंडलीय अस्पताल और पीएचसी खुद आईसीयू में अपना अंतिम सांस गिन रहा है. आलम यह है कि 24 घंटे तक बेडो पर शव पड़े रहते है लेकिन उसका सुध लेने वाला भी कोई नही रहता है. आलम यह है कि मुर्दे के बीच जिंदे मरीजो का इलाज किया जा रहा है. जिससे मरीजों के अभिवाहको में आक्रोश है. मरीज के परिजनों की माने तो स्वास्थ्य कर्मी कमीशन के खेल में शामिल होकर सरकारी अस्पताल को बर्बाद कर रहे है.
क्या कहते है मरीजों के परिजन
पिछले एक सप्ताह से जिले के डुमराँव अनुमंडलीय अस्पताल में अपने ससुर का इलाज करा रही अर्चना देवी ने बताया कि कल से ही वरिष्ठ नागरिक वार्ड में शव पड़ा हुआ है. अधिक गर्मी के कारण शव से उठ रहे दुर्गन्ध के बीच इस अस्पताल में जिंदा मरीजो का इलाज किया जा रहा है. कई बार अनुमंडलीय अस्पताल प्रशासन को सूचना दी लेकिन अब तक किसी ने नही सुना तो मजबूरन मीडिया को खबर करनी पड़ी. वही अपने बच्ची का इलाज करा रही नया भोजपुर गांव की रहने वाली सोनी देवी ने बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों को ही इलाज की जरूरत है. सदर अस्पताल में कुल 23 डॉक्टर को तैनात किया गया है. एक साजिश के तहत एक दर्जन डॉक्टर हमेशा गायब रहते है. फीर भी सिविल सर्जन से लेकर जिलाधिकारी पूरी तरह से मौन है. इस मौन के पीछे किसको क्या लाभ है यह तो वही बताएंगे.
क्या कहते है स्वास्थ्यकर्मी
वही नाम नही छापने के शर्त पर सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात एक कर्मी ने बताया कि जिले के सरकारी अस्पताल के कर्मी केवल कमीशन के खेल में लगे हुए है. आज सदर अस्पताल में दो सर्जन है. उसके बाद जनवरी से अप्रैल तक कि आंकड़ो को देखा जाए तो कभी 5 तो कभी 4 सिजेरियन हुआ है. इसी अस्पताल में एक सर्जन 30-45 सिजेरियन करता था प्रतिदिन लेकिन एक रणनीति के तहत मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है की लापरवाही वाला डर का भूत दिखाकर सरकारी अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पताल में लेकर चले जाते है. जिसके एवज में उन्हें उसी समय निजी अस्पताल से 5 हजार रुपये की सौगात मिल जाती है. मरीज की एंट्री हुई सदर अस्पताल में और बच्चे ने जन्म लिया निजी अस्पताल में. एक महीने के अंदर आरा जिला के एक निजी नर्सिंग होम में सदर अस्पताल और अनुमंडलीय अस्पताल के 50 से अधिक मरीजो को भर्ती कराया गया है. जिसका पूरा प्रमाण है. और सभी जानते है कि बक्सर में तैनात किस स्वास्थ्यकर्मी का वह अस्पताल है. हम आंकड़ो को दिखाकर अपना पीठ थपथपाते है. यदि जिलाधिकारी बंद कमरे में मुझसे बात करने को तैयार हो जाये तो सारे राज खोल दूंगा. लेकिन यहाँ हमाम में सभी नंगे है कोई सुनने वाला नही है.
क्या कहते है सिविल सर्जन
24 घण्टे से डुमराँव के अनुमंडलीय अस्पताल की बेड पर पड़े शव से उठ रहे दुर्गन्ध के बीच जिंदा मरीजों का चल रहे इलाज को लेकर जब हमने सिविल सर्जन सुरेश चंद्र सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि, इस तरह की कोई जानकारी हमे नही है. मामले को हम दिखवाते है. गौरतलब है कि जब जिले के सिविल सर्जन को ही सरकारी अस्पतालों कि बदहाल व्यवस्था की कोई जानकारी नही है ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते है कि विभाग भगवान भरोसे ही चल रहा है.

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