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जिला परिषद कर्मचारियों ने किया अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

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द जनमित्र डेस्क

जिला परिषद कार्यालय में प्रशासनिक अड़चनों और जनप्रतिनिधियों के कथित हस्तक्षेप को लेकर माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुछ सदस्यों पर सरकारी कामों में अनावश्यक दखलंदाजी, बदसलूकी और नियम-कानूनों को दरकिनार कर काम करवाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। इस विरोध में कर्मचारियों ने 23 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला कर लिया है।

कर्मचारियों ने जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त सदस्यों को एक लिखित पत्र भेजकर अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ जनप्रतिनिधि पिछले कई दिनों से अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते कार्यालय का वातावरण बिगाड़ रहे हैं। 18 जून 2026 से इन सदस्यों द्वारा लगातार चरणबद्ध धरना प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के दौरान भी उन पर दबाव बनाने की कोशिशें की गईं। कई मौकों पर कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों-कर्मचारियों से अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया, गाली-गलौज की गई और सरकारी कामकाज में जानबूझकर रुकावटें डाली गईं।

कर्मचारियों ने दावा किया कि कुछ लोग विभिन्न विकास योजनाओं के भुगतान और प्रशासनिक मंजूरी को अपने अनुसार करवाने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं। जबकि सभी प्रक्रियाएं विभागीय दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही चल रही हैं।

एक कर्मचारी राहुल कुमार ने बताया, “जिला परिषद एक संवैधानिक संस्था है जिसका मकसद गांवों में विकास योजनाओं को पारदर्शी ढंग से लागू करना है। लेकिन लगातार विरोध और अनुचित दबाव के कारण यहां सामान्य कामकाज करना बेहद कठिन हो गया है। हम केवल नियमों के अनुसार काम करना चाहते हैं।”

दूसरे कर्मचारी राजेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 1 करोड़ 35 लाख 84 हजार 337 रुपये के भुगतान हो चुके हैं और शेष योजनाओं की प्रक्रिया भी चल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी स्वीकृतियां और भुगतान पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के दायरे में किए जा रहे हैं।

कर्मचारियों ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक जिला परिषद को 36 लाख 15 हजार 360 रुपये की आय प्राप्त हुई है। साथ ही सार्वजनिक पुस्तकालय से संबंधित खर्चों की जांच ऊपरी स्तर पर चल रही है।

उनका आरोप है कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी की छवि को धूमिल करने और उन पर झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते जिला परिषद कार्यालय में भारी तनाव का माहौल बन गया है।

स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से जल्द ही कोई समाधान निकल सकता है, ताकि विकास कार्यों पर पड़ने वाले असर को रोका जा सके।

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