द जनमित्र डेस्क
बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने हाल ही में जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि अठारहवीं लोकसभा की कृषि पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्थायी समिति ने अपना 33वां प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। यह रिपोर्ट भारतीय कृषि की संप्रभुता खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से सर्वदलीय सहमति से पारित की गई है।

सांसद सिंह के अनुसार समिति ने कृषि पशुपालन मत्स्य पालन और किसान कल्याण से जुड़े विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में कृषि आयात को नियंत्रित करने पर विशेष जोर दिया गया है। समिति का मानना है कि सस्ते विदेशी उत्पादों से देश के किसानों को बचाने के लिए आयात नीति में संतुलन और सख्ती जरूरी है ताकि घरेलू कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।
प्रेस विज्ञप्ति में सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर अमेरिकी ट्रेड डील के जरिए कृषि क्षेत्र में शून्य प्रतिशत आयात शुल्क को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर संसद की स्थायी समिति जिसमें सत्तारूढ़ दल के सांसद भी शामिल हैं ने आयात पर नियंत्रण शुल्क निर्धारण और जीएम उत्पादों की कड़ी जांच की सिफारिश की है। यह स्थिति सरकार की नीतियों को लेकर व्यापक असहमति का संकेत देती है।
समिति की सिफारिशों में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से जुड़ा अहम बिंदु भी शामिल है। समिति ने पीएम आशा योजना को मजबूत करने और मूल्य समर्थन योजना के तहत तिलहन एवं दलहन की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की सिफारिश की है जो वर्तमान में महज 25 प्रतिशत तक सीमित है। इसके अलावा आयात शुल्क को घरेलू उत्पादन के आधार पर गतिशील रूप से तय करने का सुझाव दिया गया है जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिल सके।
रिपोर्ट में पाम ऑयल के आयात पर भी स्पष्ट नीति बनाने की बात कही गई है। समिति ने प्रस्ताव दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमत 800 डॉलर प्रति टन से नीचे चली जाती है तो उस पर कम से कम 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया जाना चाहिए। इससे घरेलू तेल उत्पादकों को संरक्षण मिलेगा।
बीज क्षेत्र को लेकर भी समिति ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इसमें बीजों की अधिकतम कीमत तय करने के लिए राष्ट्रीय आयोग के गठन नए बीज विधेयक को शीघ्र लाने और निजी बीज कंपनियों को विनियमित करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। साथ ही बीज संप्रभुता को मान्यता देने स्वदेशी बीजों के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।
समिति ने कृषि नीति निर्माण में विभिन्न क्षेत्रों के किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया है ताकि नीतियां जमीनी स्तर की जरूरतों के अनुसार बन सकें। इसके अलावा राज्य बीज निगमों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता से जुड़े नियमों में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
खाद्य तेल क्षेत्र में सुधार के लिए समिति ने राइस ब्रान ऑयल के उपयोग को बढ़ावा देने और तेल उद्योग में दक्षता बढ़ाने की बात कही है। वहीं आनुवंशिक रूप से संशोधित यानी जीएम खाद्य पदार्थों और बीजों के आयात पर सख्त निगरानी रखने की सिफारिश की गई है। समिति ने साफ किया है कि पोर्ट ऑफ एंट्री पर सभी आयातित कृषि एवं खाद्य उत्पादों की विस्तृत जांच अनिवार्य की जानी चाहिए ताकि अवैध जीएम उत्पादों के प्रवेश को रोका जा सके।
सुधाकर सिंह ने कहा कि यह प्रतिवेदन देश के किसानों के हितों की रक्षा करने और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक नीतिगत बदलाव करेगी जिससे देश की कृषि व्यवस्था और अधिक मजबूत और सुरक्षित बन सके।


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