द जनमित्र | शशि
बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने खुलासा किया कि बीते 20 सालों में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर 80,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात।





RJD सांसद के अनुसार, 2005 में राबड़ी देवी के शासनकाल के अंत में 12.5 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई सुविधा थी, जो अब सिकुड़कर 9.5 लाख हेक्टेयर रह गई। हर साल 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाके घटने की बजाय बढ़ रहे हैं।
सांसद ने रोहिणी नक्षत्र में नहरों में पानी न छोड़ने का मुद्दा भी उठाया, जिससे किसानों को बिचड़ा डालने में मुश्किल हो रही है। सोन नहर प्रणाली की हालत बद से बदतर है। इंद्रपुरी बैराज में 9000 क्यूसेक पानी होने के बावजूद महज 3000 क्यूसेक ही छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वाणसागर जलाशय में बिहार के हिस्से का 1158 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पड़ा है, लेकिन इसे छोड़ने की कोई योजना नहीं। मानसून में नहरों की मरम्मत के नाम पर किसानों का नुकसान हो रहा है, और फायदा सिर्फ ठेकेदारों को मिल रहा है।
सुधाकर सिंह ने मांग की कि 80,000 करोड़ के खर्च की स्वतंत्र जांच हो, 15 मई से पहले नहरों में पानी छोड़ने की पुरानी व्यवस्था बहाल हो, और किसानों की सिंचाई जरूरतों को प्राथमिकता मिले। उन्होंने दोषी अधिकारियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय करने और मानसून से पहले नहरों की मरम्मत पूरी करने की मांग भी की।
चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की उपेक्षा जारी रखी, तो RJD हर गांव-खेत में किसानों के साथ सड़कों पर उतरेगा। यह लड़ाई अब सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि किसानों के वजूद की है। राजद ने जल संसाधन विभाग की भ्रष्ट नीतियों के खिलाफ जन आंदोलन का ऐलान किया है।


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