द जनमित्र | शशि
जिला के स्कूलों में अब छोटे बच्चों को भोजपुरी की माटी की महक वाली कहानियां और कविताएं पढ़ने को मिलेंगी। बाल साहित्य विकास कार्यक्रम के तहत एक खास कार्यशाला में शिक्षकों ने भोजपुरी में रचनाएं गढ़ी हैं, जो बच्चों के दिल और दिमाग को छूने वाली हैं। जिले के स्कूलों के शिक्षकों ने 20 रचनाएं तैयार कीं, जिनमें से 8 को पहले चरण में चुना गया है। इन पर अब चित्रों की रंगत चढ़ाई जा रही है।




राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू हुआ ये कार्यक्रम पहले आईपीइएल संस्था संभाल रही थी, लेकिन किसी वजह से वो रुक गया। अब गया का करूणोदय फाउंडेशन इसे नए जोश के साथ आगे बढ़ा रहा है। फाउंडेशन इन भोजपुरी रचनाओं को किताब की शक्ल देगा, जो स्कूलों के पुस्तकालयों में बच्चों तक पहुंचेगी।
चुनी गई रचनाओं में डुमरांव के लाखनडिहरा स्कूल के शिक्षक विमल कुमार सिंह की कहानी ‘गुल्लक’, अरियांव मध्य विद्यालय की सविता कुमारी की ‘भुअरा’, कोरान सराय मध्य विद्यालय के पूर्णानंद मिश्रा की ‘पुआ पकावे’ और ‘धान के रोपनी’ जैसी रचनाएं शामिल हैं। सिमरी के हलवाचट्टी स्कूल के चंदन कुमार गुप्ता की ‘दाल की दुल्हन’, नावानगर के भगवान सत्यनारायण की ‘छोटू के रोपनी’, और केसठ के इमाम अंसारी की ‘बिलईया के रूप’ व ‘खस्सी और शेर’ भी इस संग्रह का हिस्सा हैं।
डुमरांव के डायट में हुई तीन दिन की कार्यशाला में इन रचनाओं को संजोकर प्रकाशन के लिए तैयार किया गया। डायट के प्राचार्य डॉ. विवेक कुमार मौर्य ने बताया कि चयन के लिए बाल साहित्य विशेषज्ञ नवनीत कुमार सिंह, सुजीत कुमार और नवनीत कुमार की टीम ने मेहनत की। आगे इसे और बेहतर करने के लिए फिर से तीन दिन की कार्यशाला होगी।
कार्यशाला के समन्वयक नवनीत कुमार सिंह ने बताया कि रचनाओं पर चित्रांकन का काम पूरा हो चुका है। करूणोदय फाउंडेशन के अजीत कुमार ने कहा कि ये भोजपुरी किताबें सभी स्कूलों के पुस्तकालयों में होंगी, ताकि बच्चे अपनी माटी की भाषा में कहानियों और कविताओं का आनंद ले सकें। किताब का प्रकाशन फाउंडेशन की देखरेख में जल्द होगा।


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