बक्सर जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत मझरिया गांव में शुक्रवार रात शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग ने तबाही मचा दी। आग की लपटों ने लगभग एक दर्जन झोपड़ियां जलाकर राख कर दीं, जिससे पांच परिवार पूरी तरह बेघर हो गए। इस हादसे में 60-70 क्विंटल अनाज, करीब 68 हजार रुपये नकद, जरूरी कागजात और घरेलू सामान जलकर खाक हो गया। दो बछड़ों और एक गाय की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई पशु झुलस गए।
मवेशियों को बचाने के प्रयास में किसान शिवजी यादव गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज विश्वामित्र अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है और 80 प्रतिशत तक झुलसने के कारण निरंतर उपचार जारी है।

संकट की इस घड़ी में विश्वामित्र सेना ने सबसे पहले पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचकर मानवीय संवेदना का परिचय दिया। संगठन के वरिष्ठ सदस्य गोवर्धन चौबे के नेतृत्व में टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों में कंबल और बिस्तर का वितरण किया। यह राहत सामग्री ठंड से बचाव के साथ-साथ पीड़ितों को यह संदेश भी दे गई कि वे इस मुश्किल में अकेले नहीं हैं।
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने पीड़ितों से वीडियो कॉल पर बात करते हुए कहा, “मझरिया के अग्नि पीड़ितों का दर्द हमारा अपना दर्द है। यह सिर्फ राहत नहीं, बल्कि हमारा दायित्व है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि संगठन आगे भी खाद्यान्न, वस्त्र और पुनर्वास में हर संभव सहायता करेगा तथा प्रशासन और समाज से भी सहयोग की अपील की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने विश्वामित्र सेना की इस त्वरित और जमीनी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब ज्यादातर लोग सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहते हैं, तब यह संगठन ने सेवा की सच्ची मिसाल पेश की है।
इस दौरान गांव के ही पत्रकार बबलू उपाध्याय की भी प्रशंसा हो रही है, जिन्होंने आग बुझाने में सक्रिय भूमिका निभाई और गंभीर रूप से झुलसे शिवजी यादव को तुरंत विश्वामित्र अस्पताल पहुंचाया। वे लगातार पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास में जुटे हैं, जिससे उन्होंने पत्रकारिता के साथ इंसानियत का भी उदाहरण प्रस्तुत किया।
यह अग्निकांड भले ही भौतिक नुकसान पहुंचाकर परिवारों के सपनों को राख में बदल दे, लेकिन विश्वामित्र सेना और संवेदनशील लोगों की पहल ने साबित कर दिया कि इंसानियत की लौ आज भी जल रही है। पीड़ित परिवारों के लिए यह मदद न केवल राहत है, बल्कि नई शुरुआत की उम्मीद भी।


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