शिक्षा

एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों ने दिखाई व्यापारिक समझ और लजीज व्यंजनों की धूम

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द जनमित्र डेस्क

सदर प्रखंड अंतर्गत कमरपुर पंचायत के कृतपुरा गांव स्थित एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल परिसर रविवार को उल्लास, रचनात्मकता और भावनाओं से सराबोर हो उठा। यहां आयोजित भव्य बाल मेले का उद्घाटन विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय के बुजुर्ग सासु मां श्रीमती बनारसी देवी और ससुर श्री विजय कुमार राय ने संयुक्त रूप से किया।

फीता कटते ही पृष्ठभूमि में गूंजा मधुर गीत “हे मात-पिता तुम्हें वंदन, जो मुझे इस दुनिया में लाया…” ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। माता-पिता को सर्वोच्च स्थान देते हुए उनके हाथों से ही उद्घाटन कराना कार्यक्रम की सबसे खास बात रही।

उद्घाटन के बाद अतिथियों ने बच्चों द्वारा सजाए गए विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया। उन्होंने बच्चों के हाथों बने पानीपुरी, चाउमीन, बर्गर, मंचूरियन, समोसा, जलेबी, गाजर का हलवा, बिस्कुट, चिप्स और चॉकलेट जैसे लजीज व्यंजनों का स्वाद चखा और स्वच्छता व शुद्धता पर सवाल भी किए। मेले में सबसे ज्यादा चाउमीन की डिमांड रही।

खास बात यह रही कि बच्चे खुद ही खरीद-बिक्री संभाल रहे थे, जिससे उनमें आत्मविश्वास और बाजार की व्यावहारिक समझ साफ नजर आई। खुशी कुमारी, मानवी राय, साक्षी कुमारी, मोनालिका, अनुराधा, लक्ष्मी, प्रतिज्ञा, सपना, अदिति सिंह, कुमार प्रगति, अनमोल कुमार, पियूष पाठक जैसे कई छात्र-छात्राओं ने स्टॉल की जिम्मेदारी संभाली।

विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय ने बताया कि बाल मेले का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है, ताकि वे पढ़ाई के साथ मनोरंजन और बाजार की बुनियादी समझ भी हासिल कर सकें। प्रधानाध्यापक त्रिलोचन कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में कलात्मक और रचनात्मक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।

खाने-पीने के स्टॉलों के अलावा मेले में मिकी माउस स्लाइडिंग, जंपिंग यार्ड, प्लेन स्लाइडर, झूला और रंग-बिरंगे गुब्बारे, बांसुरी व विभिन्न खिलौनों की खूब बिक्री हुई। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।

उप निर्देशिका जिज्ञासा कुमारी ने बताया कि उम्मीद से कहीं ज्यादा अभिभावक मेले में शामिल हुए। उन्होंने सफलता का श्रेय पूरे विद्यालय परिवार, बच्चों और अभिभावकों की सामूहिक मेहनत को दिया।

कुल मिलाकर यह बाल मेला न केवल बच्चों की प्रतिभा और आत्मनिर्भरता का मंच साबित हुआ, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान, संस्कार और भावनात्मक जुड़ाव का भी सुंदर संदेश दे गया।

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