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बच्ची को मिला नया परिवारः बेंगलुरु के दंपत्ति ने गोद लिया

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द जनमित्र डेस्क

जिले के विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान में रह रही एक छोटी बच्ची को अब नया परिवार मिल गया है। बेंगलुरु निवासी एक दंपति को इस बच्ची को दत्तक ग्रहण से पहले पालन-पोषण और देखभाल के लिए सुपुर्द किया गया। जिला पदाधिकारी श्रीमती साहिला ने स्वयं इस पूरी प्रक्रिया को पूरा किया।

बालिका को गोद में लेते ही दंपति भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की और इसे बच्ची के बेहतर कल की शुरुआत बताया। यह घटना 19 मार्च को हुई, जिसमें जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी, बाल संरक्षण पदाधिकारी और संस्थान के समन्वयक भी मौजूद रहे।

जिला प्रशासन ने इस मौके पर दत्तक ग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। गोद लेने की इच्छा रखने वाले अभिभावकों को अनिवार्य रूप से केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (CARA) के पोर्टल CARINGS (carings.wcd.gov.in) पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।

पंजीकरण के बाद पहचान के प्रमाण जैसे आधार, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र में से एक दस्तावेज जमा करना होता है। सभी आवश्यक कागजात 30 दिनों के अंदर अपलोड करने अनिवार्य हैं।

प्रक्रिया में घरेलू जांच रिपोर्ट, प्रतीक्षा सूची में नाम, बच्चे से मिलान, आरक्षण, मंजूरी और अंत में अदालत में याचिका दाखिल करना जैसे कई पड़ाव आते हैं। अभिभावकों की शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और गोद लेने की मंशा का भी गहन मूल्यांकन होता है।

नियमों के मुताबिक विवाहित जोड़े में कम से कम दो साल का स्थिर वैवाहिक जीवन होना चाहिए और दोनों की सहमति जरूरी है। एकल पुरुष केवल लड़के को गोद ले सकते हैं, जबकि एकल महिला लड़के या लड़की दोनों को अपनाने की पात्र हैं।

दो बच्चों वाले दंपति सामान्य श्रेणी के बच्चों को गोद नहीं ले सकते; वे केवल विशेष जरूरत वाले बच्चों को ही अपना सकते हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि कोई भी अवैध तरीके से बच्चा गोद लेना या देना गंभीर अपराध है, इसलिए पूरी प्रक्रिया कानूनी ढांचे में ही पूरी करनी चाहिए।

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