द जनमित्रब डेस्क
अहियापुर गांव में हुए तिहरे हत्याकांड ने पूरे इलाके को दहशत में डुबो दिया था, और अब प्रशासन ने इस जघन्य अपराध के आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कोर्ट से कुर्की वारंट हासिल होने के बाद जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के हुक्म पर राजपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार और अंचलाधिकारी शोभा कुमारी की अगुवाई में कार्रवाई का आगाज हुआ।




अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ अहियापुर पहुंचा, जहां कुर्की-जब्ती का तांडव शुरू हुआ।
मौके पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धीरज कुमार और थाना अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह के साथ पुलिस का भारी जमावड़ा था। खबरों के मुताबिक, प्रशासन ने 6 बुलडोजर और 8 ट्रैक्टर का इंतजाम किया था ताकि कार्रवाई में कोई कसर न छूटे। सबसे पहले आरोपियों के घरों से पालतू मवेशियों को जब्त कर सुरक्षित जगहों पर भेजा गया। फिर बुलडोजरों ने दरवाजे-खिड़कियां उखाड़नी शुरू कीं। गांव में अफरातफरी मच गई, हर तरफ डर और दहशत का आलम था।
लेकिन इस बड़े पैमाने की कार्रवाई में प्रशासन की सुस्ती भी सुर्खियां बटोर रही है। बताया जाता है कि जिलाधिकारी ने दिन में ही कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था, मगर प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी के देर से पहुंचने की वजह से यह शाम 6:30 बजे शुरू हो सकी। इस देरी ने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए। मजिस्ट्रेट की भूमिका निभा रहे इन अधिकारियों ने अपनी देरी के लिए तरह-तरह के बहाने गढ़े, जिससे उनकी कार्यशैली पर उंगलियां उठने लगीं।
गांव वालों का मानना है कि प्रशासन का यह कदम काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन अगर इसे वक्त पर और बेहतर ढंग से अंजाम दिया जाता, तो इसका असर कहीं ज्यादा गहरा होता। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ अहियापुर में खौफ का माहौल पैदा किया, बल्कि प्रशासन की चुस्ती और उसके अमले की कार्यकुशलता पर भी सवालिया निशान लगा दिए। तिहरे हत्याकांड के बाद गांव में तनाव भरी खामोशी पसरी है, और पुलिस हर हरकत पर पैनी नजर रखे हुए है।


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