जनमित्र / बक्सर: इस बार शबे बरात को मस्जिदों में पंजगाना एवं जुम्मा की नमाज सामूहिक रूप से अदा नहीं की जायेगी. 9 अप्रैल को शबे बरात एहताम मनाया जायेगा. दारूल उलूम अशरफिया मुख्तारूल उलूम के सेक्रेटरी डॉक्टर निसार अहमद ने हजरात से गुजारिश की है कि शबे बरात के अवसर पर लोग कब्रिस्तान न जाकर अपने घर में हैं इबादत करें और मरहुमीन के ईशाले सवाब के लिए दुआ करें.

आग्रह किया है कि जिस तरह पांचों वक्त की नमाज, जुमे की नमाज के बदले जोहर की नमाज अपने-अपने घरों में अदा कर रहे हैं. उसी तरह शबे बरात की रात हम सभी अपने-अपने घरों में नमाज, कुरान की तिलावत और अल्लाह पाक से दुआ मांगे कि दुनियां के सभी इंसानों को इस कोरोना बीमारी से निजात दिला सके. उल्लेखनीय है कि शबे बरात के मौके पर कब्रिस्तान में मुस्लिम समुदाय के लोग फातेहा पढ़ते है. कोरोनावायरस से बचाव के लिए जरूरी है कि लोग घरों से बाहर नहीं निकले तथा कहीं समूह में इकट्ठा नहीं हो. इसलिए लोगों से इस अवसर पर कब्रिस्तान नहीं जाकर अपने घर में ही इबादत करने की अपील की है







