गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
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नई शिक्षा नीति को अभाविप के नेताओं ने जमकर सराहा…..

जनमित्र/बक्सरः नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारत सरकार के शिक्षा विभाग ने मंजूरी दे दी है. नई शिक्षा नीति के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा विभाग कर दिया गया है. इस शिक्षा नीति के लागू होने पर हर्ष जताते हुए विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य विवेक सिंह ने कहा कि इस बार कोविड 19 के संक्रमण को देखते हुये अक्टूबर-नवंबर से सत्र शुरू होने की संभावनाएं बन रही है. केंद्र सरकार का उद्देश्य यह है कि सत्र शुरू होने के पहले

NEP को सपूर्ण रूप से लागू कर नए सत्र से पढ़ाई शुरू की जाए. इस शिक्षा नीति को इसरो के ड्राफ्ट प्रमुख रहे कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों वाली समिति ने तैयार किया है. यह शिक्षा नीति 21 वी सदी की जरूरतों पर आधारित है जिसमे पर्यावरण,कला और खेल जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. वही विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक त्रिभुवन पाण्डेय ने बताया कि नई शिक्षा नीति

का उदेश्य वैसे सभी छात्रों को एक साथ शिक्षा देना है जिन्होंने स्कूल ड्राप कर दिया. इस शिक्षा नीति के तहत आर्ट्स, साइंस और स्पोर्ट्स के बच्चों के बीच गैप भी कम होगा साथ ही फिजिकल एडुकेशन पर भी जोर दिया गया है. अगले वक्ता सनी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में त्रि-स्तरीय भाषा फॉर्मूला का ध्यान रखा गया है. इसमें क्षेत्र के हिसाब से उनकी संस्कृति का ध्यान रखा गया है. इसमें मातृभाषा पर विशेष

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जोर दिया गया है. अगले वक्ता अविनाश पाण्डेय ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सभी राज्यों में पठन-पाठन पर नज़र रखने लिए स्टेट स्कूल रेगुलर बॉडी का भी गठन किया गया है. ये सभी राज्यो में अलग अलग होंगी.