ग्राउंड रिपोर्टस्थानीय

इस बार भोजन के लिए थाली और बर्तन बजाए गए

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जनमित्र/बक्सरः भोजन, मज़दूरी व सामाजिक सुरक्षा के हक़ के लिए भाकपा माले के आह्वान पर मणियाँ पंचायत के सभी गांवों मणियां, पनियारी, सारा, डिहरी, इटौंहा व सलसला में गरीब लोगों ने अपने अपने घरों के बाहर खड़े होकर दोपहर 2:00 से 2:10 तक सोसल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए थाली -बर्तन बजाकर अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।

इस संबंध में माले नेता व मड़ियाँ पैक्स अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि देश की गरीब आबादी ने कोरोना संकट व तैयारी के बिना किए गए लॉकडाउन के समय सर पर गठरी उठाए सैकडों किलोमीटर पैदल नाप दिए. उनमें से अनेक तो अपनों के पास पहुंच भी नहीं पाए. बीमारी और भूख से नौनिहालों की मौत की भी खबर आई. राहत की सरकारी घोषणाएं ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही हैं. जनसहयोग से चल रहे राहत कार्य भी नाकाफी हैं. रोज़ की मजदूरी पर गुज़र करने वाली विशाल आबादी के पास अब कोरोना वायरस से पहले भूख से मौत का खतरा मौजूद है.


अब तक के सभी मिल रहे संकेतों से यह माना जा रहा है कि लॉकडाउन की अवधि बढ़ायी जाएगी, सरकारों के समक्ष यह मांग पुरज़ोर ढंग से उठाया जाना ज़रूरी है कि देश के सभी गरीब श्रमिकों व उनके आश्रितों के भोजन की पूरी गारंटी करनी होगी. भाकपा-माले का यह मानना है कि प्रधानमंत्री के कहने पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता दिखाते हुए थाली भी बजाई गयी और दिए भी जलाए गए. पर इस बार भूख से तड़पते गरीबों की सूखी थाली बजेगी और सरकारों को याद दिलाएगी कि भोजन की गारंटी के बिना , भूखा भारत कोरोना से नहीं लड़ सकता.

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