द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिले के सिमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर गांव में सोमवार शाम अचानक उठी तेज आंधी और बारिश ने एक युवा जीवन छीन लिया। फूस की झोपड़ी ढह जाने से 14 वर्षीय कौशल कुमार दबकर घायल हो गया और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में संसाधनों की कमी और लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना के अनुसार, सोमवार शाम अचानक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हुई। इसी दौरान कौशल कुमार गांव में फूस की मड़ई के पास खड़ा था। प्रचंड हवा के झोंके से मड़ई अचानक ढह गई और किशोर उसके नीचे फंस गया। आस-पास के ग्रामीणों ने तुरंत मदद की, मलबा हटाकर बच्चे को बाहर निकाला और उसे तुरंत सिमरी सीएचसी पहुंचाया।

परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऑक्सीजन सप्लाई ठीक से उपलब्ध नहीं थी, पल्स ऑक्सीमीटर की बैटरी खत्म थी और आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपकरण काम नहीं कर रहे थे। अस्पताल परिसर में एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन उसका ड्राइवर गायब था, जिससे रेफरल में काफी देरी हुई। आरोप है कि करीब आधे घंटे तक किशोर को उचित प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल सका।
बाद में डॉक्टरों ने बच्चे को बेहोशी की हालत में उच्चतर केंद्र रेफर कर दिया। परिजनों ने निजी वाहन से उसे बक्सर सदर अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। अस्पताल के रिकॉर्ड में पेशेंट नंबर 2732 के तहत उसे बेहोश अवस्था में रेफर किया गया था, फिर भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।
एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें परिजन अचेत बच्चे को गोद में लिए अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मदद की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना के एक दिन बाद जब सिमरी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रेमचंद प्रसाद से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई सूचना नहीं है और अगर कोई गंभीर मामला होता तो स्टाफ उन्हें जरूर बताता। उनका यह बयान स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।


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