द जनमित्र | शशि
सदर अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को एक 23 वर्षीय प्रसूता पार्वती देवी की मौत हो गई। मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। करीब तीन घंटे तक अस्पताल परिसर में अफरातफरी और तनाव का माहौल रहा। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति पर काबू पाया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

जानकारी के मुताबिक, औद्योगिक थाना क्षेत्र के बड़की सरीमपुर गांव निवासी सोनू चौधरी की पत्नी पार्वती देवी को 25 सितंबर को प्रसव पीड़ा होने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां शाम को ऑपरेशन के माध्यम से एक बच्ची का जन्म हुआ। परिजनों ने बताया कि सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अगले दिन 26 सितंबर की शाम को अचानक पार्वती की तबीयत बिगड़ गई। उनके हाथ-पैर में ऐंठन शुरू हो गई और वह बार-बार बेहोश होने लगीं।
पति सोनू चौधरी ने बताया, “हमने ड्यूटी पर मौजूद नर्स और डॉक्टर अनीता कुमारी को तुरंत सूचित किया, लेकिन उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया और हमें डांटकर भगा दिया।” सोनू का आरोप है कि पत्नी की हालत लगातार बिगड़ती रही और जीभ बाहर निकल आई, लेकिन डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे। जब हंगामे के बाद डॉक्टर आए, तब तक पार्वती की मौत हो चुकी थी। इससे आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की।
स्थिति बिगड़ते देख नगर थाना, मुफस्सिल थाना और इटाढ़ी थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। बक्सर एसडीपीओ दीपचंद जोशी (वीडियो में उल्लिखित) ने भी अस्पताल पहुंचकर परिजनों को समझाया-बुझाया। पुलिस की कड़ी मशक्कत और प्रशासनिक प्रयासों के बाद मामला शांत हुआ।
यह सदर अस्पताल में लापरवाही का पहला मामला नहीं है। इससे पहले 22 जुलाई को औद्योगिक थाना क्षेत्र के वरुण गांव निवासी प्रदीप यादव की छह वर्षीय बेटी साजल कुमारी की मौत इंजेक्शन लगाने के बाद हो गई थी। उस मामले में भी परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में देरी और गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया था। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया था, जबकि डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग को लेकर ओपीडी का बहिष्कार किया था।
नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा, “मृतका के परिजनों से लिखित आवेदन प्राप्त कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।” लगातार सामने आ रहे ऐसे आरोपों ने एक बार फिर सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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