“राजद के फायर ब्राण्ड नेता सुधाकर सिंह के बयान पर बोले जदयू जिलाध्यक्ष अशोक यादव, औकात में रहे जदयू के नेता नही तो जनाधार का गुरुर दो मिनट में हो जाएगा चकनाचूर. हिम्मत है तो स्थिफ़ा देकर चले चुनाव मैदान में, नचनीया है या बजनीया पता चल जाएगा औकात”.
द जनमित्र | सरिता कुमारी
बक्सर: राजद के फायर ब्रांड नेता बिहार सरकार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह के बयान के बाद महागठबंधन में घमासान मच गया है. सुधाकर सिंह के बयान पर जदयू जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने राजद पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा की, किसानों को भड़का कर एसजेवीएन पावर प्लांट पर अपना कब्जा जमाने के फिराक में राजद नेता सुधाकर सिंह एवं उनके पिता राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह लगे हुए है. लेकिन उनका यह मंसा पूरा होने वाला नही है. नीतीश कुमार के सामने जिसकी औकात खड़ा होने का भी नही है, वह उनके विकास पर अँगुली उठा रहा है. यह सारा राजनीतिक खेल राजद के बड़े नेताओ के इशारे पर ही खेला जा रहा है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने यदि उनपर लगाम नही लगाया तो जदयू नेताओ को ऐसे नेता पर लगाम लगाने आता है.
है हिम्मत तो चले चुनाव में पता चलेगा औकात
वही उन्होंने कहा कि जिस नीतीश कुमार के कृपा से राजद के नेता सता सुख भोग रहे है. उसी पार्टी के नेता नीतीश कुमार के विकास पर सवाल उठा रहे है. पूरा देश जानता है कि उनके कार्य काल में बिहार में क्या था और नीतीश कुमार ने आज बिहार को कहा पर लाकर खड़ा कर दिया है. इतना ही बिहार के मालिक बनने का शौख है तो स्थिफ़ा देकर चले चुनावी मैदान में बिहार की जनता बता देगी की, उनकी औकात नचनिया बनने की है या बजनी और कहार बनने की.
2024 में लड़े चुनाव तो चुकाएंगे कीमत
वही उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में या 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सुधाकर सिंह या उनके पिता जगदानंद सिंह बक्सर से लड़ेंगे तो, जदयू उनकी जमानत जब्त करा देगी. एमएलसी चुनाव के दौरान ही जिले के मतदाता खुलकर विरोध कर रहे थे कि, जिले में एक विधायक जीता है तो इतना अहंकार में पार्टी के नेता है. एक और जीत गये तो रहने ही नही देगे और लोग वोट देने से मना कर रहे थे.
गौरतलब है कि राजद के फायर ब्रांड नेता सुधाकर सिंह, बक्सर के चौसा में आंदोलित किसानों के समर्थन में धरना प्रदर्शन में शामिल होने के साथ ही बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए कहा कि, बिहार में 18 साल से एक ही दूल्हा कहार बदल-बदल कर राज कर रहा है. हमने भी 45 दिनों तक उनके पालकी को ढोया लेकिन जब लगा कि पालकी में बैठा दूल्हा बोझ है, तो हमने कहार बनना छोड़ दिया.

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