द जनमित्र डेस्क
दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता प्रेम में बदला और फिर खूनखराबे में तब्दील हो गया, बासुदेवा थाना इलाके की यह घटना सुनकर लोग दंग रह गए। जिस दोस्त पर वीरेंद्र सिंह का पूरा यकीन था, उसी ने कथित रूप से उसकी पत्नी से अवैध संबंध बना रखा था। पुलिस कहती है कि जब पति इस रिश्ते में बाधा बनने लगा तो पत्नी और उसका प्रेमी मिलकर उसे खत्म करने की साजिश में जुट गए। 19 जुलाई की रात गड़ासी से उसकी हत्या कर दी गई और पहचान मिटाने के लिए शव को कपड़े उतारकर नहर में फेंक दिया गया।

21 जुलाई की सुबह डुमरांव नहर लाइन मार्ग पर कुलमनपुर गांव के पास नहर में एक नग्न शव तैरता हुआ मिला। शव किसका है, हत्या का मकसद क्या था और हत्यारा कौन, इन सवालों ने पुलिस के सामने पहेली खड़ी कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पहचान के लिए सोशल मीडिया व अखबारों का सहारा लिया गया। दो दिन बाद 23 जुलाई को मृतक के परिजन बासुदेवा थाना पहुंचे और शव को रोहतास जिले के काराकाट थाना क्षेत्र के डेरा चांदी गांव के वीरेंद्र सिंह के रूप में पहचाना।
इसके बाद असली रहस्य सामने आने लगा। जांच में पता चला कि वीरेंद्र सिंह और अरविंद कुमार गहरे दोस्त थे। दोनों साथ खेती करते थे और एक-दूसरे के घर आते-जाते रहते थे। वीरेंद्र अपने दोस्त पर इतना विश्वास करता था कि पत्नी को लाने-ले जाने का काम भी कई बार उसी के हवाले कर देता था। पुलिस के अनुसार इसी आवाजाही के दौरान करीब आठ महीने पहले वीरेंद्र की पत्नी ममता देवी और अरविंद के बीच नजदीकी बढ़ी और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया।
दोनों शादी करना चाहते थे। जब वीरेंद्र को इस बात की खबर लगी तो घर में झगड़े शुरू हो गए। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद दोनों ने मिलकर वीरेंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। जिस घर में पति अपनी पत्नी और दोस्त पर भरोसा कर रहा था, उसी घर की दीवारों के अंदर उसकी मौत की साजिश रची जा रही थी।
19 जुलाई की रात ममता देवी और अरविंद कुमार ने योजना के मुताबिक वीरेंद्र सिंह की गड़ासी से हत्या कर दी और शव को नहर में बहा दिया। पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के लिए शव को नग्न कर दिया गया।
वीरेंद्र के भाई जितेंद्र सिंह के बयान पर बासुदेवा थाना में कांड संख्या 94/26 दर्ज किया गया। पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। कड़ियां धीरे-धीरे ममता देवी और अरविंद कुमार तक पहुंच गईं। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। थानाध्यक्ष अनिल कुमार पासवान के अनुसार दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।
आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल गड़ासी, टीवीएस मोटरसाइकिल, एक एंड्रॉयड मोबाइल, एक कीपैड फोन और अन्य सामान बरामद किए गए। दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया जहां से वे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गए।
वीरेंद्र और अरविंद की दोस्ती अब इस हत्याकांड की सबसे कड़वी याद बन गई है। जिस व्यक्ति को वीरेंद्र अपना सबसे करीबी दोस्त मानता था, वही उसकी पत्नी के साथ कथित प्रेम संबंध में था। भरोसे की यही डोर आखिरकार उसकी जान ले गई।
इस पूरे मामला का सबसे दुखद पहलू तीन मासूम बच्चे हैं। वीरेंद्र की दो बेटियां और एक बेटा है। पिता की हत्या हो चुकी है और मां हत्या के आरोप में जेल पहुंच गई है। तीनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है। अब उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी चाचा जितेंद्र सिंह पर आ गई है। घटना के बाद गांव में शोक की लहर है और लोग यही पूछ रहे हैं कि जिस दोस्त को परिवार का हिस्सा समझा गया, वही इतनी बड़ी साजिश का हिस्सा कैसे बन गया।

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