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घट रहा गंगा का जलस्तर, बाढ़ पीड़ितों को मिली राहत की उम्मीद

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार नीचे आ रहा है। बुधवार सुबह 10 बजे नदी का स्तर 59.87 मीटर दर्ज किया गया। पिछले एक घंटे में पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से घट रहा है। इससे बाढ़ से जूझ रहे इलाकों के निवासियों में राहत की संभावना बढ़ी है। हालांकि पानी अभी भी चेतावनी स्तर से ऊपर बना हुआ है।

गंगा का चेतावनी स्तर 59.32 मीटर और खतरे का निशान 60.32 मीटर निर्धारित है। फिलहाल जलस्तर चेतावनी से 55 सेंटीमीटर ऊपर तथा खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे है। मंगलवार को नदी का स्तर 60.02 मीटर था, जिसके बाद से इसमें निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव अभियान जारी रखे हुए है। बक्सर, चौसा, ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी अंचल की 12 पंचायतों के 25 गांव प्रभावित हैं। इन इलाकों में लगभग 9,989 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के आवागमन के लिए बुधवार को 27 नावें संचालित की जा रही हैं। अब तक कुल 36 नावें चलाई जा चुकी हैं। जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने नाव सेवा और निगरानी व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरती है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों को बारिश और पानी से बचाने के लिए पॉलीथीन शीट वितरित की जा रही हैं। अब तक 4,980 शीट बांटी जा चुकी हैं। मवेशियों के लिए 65.75 क्विंटल पशुचारा भी उपलब्ध कराया गया है।

सिमरी अंचल सबसे अधिक प्रभावित है। यहां करीब 5,700 लोगों पर असर पड़ा है और 12 नावें चल रही हैं। इस अंचल में अब तक 2,832 पॉलीथीन शीट तथा 31.55 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। ब्रह्मपुर में 2,889 लोग प्रभावित हैं। यहां सात नावें संचालित हैं तथा 1,100 पॉलीथीन शीट और 34.20 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है।

गंगा नदी में एसडीआरएफ की टीम भी तैनात है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। चिकित्सा शिविर तथा पशु चिकित्सा शिविर लगाने की व्यवस्था की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध हो सके।

जलस्तर में गिरावट से फिलहाल राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन गंगा अभी भी खतरे के निशान के करीब बनी हुई है। प्रशासन प्रभावित गांवों में निरंतर निगरानी रख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में होने वाले बदलाव के अनुरूप राहत और बचाव कार्य आगे भी जारी रखे जाएंगे।

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