आधी रात को मरीज बनकर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे सिविल सर्जन को स्वस्थ्यकर्मियो और गार्ड ने बताई औकात, तो खुल गई मिशन-60 और मिशन क्वालिटी की पोल.
अस्पताल में व्यवस्थाओं को जानने के लिए सरकारी गार्ड और गाड़ी को दूर छोड़कर पैदल ही पहुंचे थे सिविल सर्जन.
द जनमित्र | सरिता कुमारी
बक्सर : बिहार के बक्सर में सिविल सर्जन को उनके ही नीचे काम करने वाले अस्पताल के गार्ड और सुरक्षा कर्मियो ने उन्हें आधी रात को अस्पताल परिसर से भगा दिया, जिसके बाद पूरे महकमें में हड़कम्प मच गया है. आननफानन में शोकॉज कर विभाग कोरम पूरा करने में लगा हुआ है.
मरीज बनकर अस्पताल में इलाज कराने पहुँचे थे सिविल सर्जन
दरअसल बिहार सरकार के स्वास्थ्यमंत्री सह उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, मंत्रालय का पदभार लेने के साथ ही आधी रात को सरकारी अस्पताल की जांच करने पहुँच गए थे. जिसका राष्ट्रीय पटल पर खूब चर्चाएं हो रही थी. जिसके बाद अधिकारियो मे आधी रात को अस्पताल पहुँचकर जायजा लेने की होड़ मच गई, जिसमे कितनो को फजीहत होकर वापस लौटना पड़ा. एक ऐसा ही वाकया बिहार के बक्सर में हुआ है जहां सिविल सर्जन को अस्प्ताल के गार्ड एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने आधी रात को भगा दिया. सीएसके बार-बार आग्रह करने के बाद भी अस्पताल के गाने उनका सहयोग नहीं किया.

सीएस ने कहा बिना ड्यूटी किये बन जाता है हाजरी
बक्सर के नए सिविल सर्जन डॉ सुरेश चंद्र सिन्हा ने बीती रात डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल एवं सिमरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को जानने के लिए स्वयं मरीज बन टी-शर्ट पहन कर और गमछा लेकर सामान्य नागरिक की तरह अस्पताल पहुँच गए. गाड़ी और बॉडीगार्ड को भी उन्होंने दूर ही छोड़ दिया था और पैदल ही व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत देखने पहुंच गए लेकिन वहां मिशन-60 और मिशन क्वालिटी की पूरी पोल ही खुल गई जब मछड़दानी के अंदर सो रहे गार्ड एवं स्वास्थ्य कर्मियो ने उन्हें डाँटकर भगा दिया और कल आने की नशीहत तक दे डाली. अंततः सिविल सर्जन को यह बताना पड़ा कि वह मरीज नही है सिविल सर्जन है. जिसके बाद उन्हें बैठने के लिए कुर्सी दिया गया.

अस्पताल में झोल ही झोल
सरकारी अस्पताल के कर्मियो के इस रवैया से क्षुब्ध सीएस ने जीएनएम सुरक्षा प्रहरी से लेकर चिकित्सक कार्यशैली को नजदीक से महसूस किया साथ ही साथ अस्पताल में रोगियों को मिलने वाली सुविधाओं की भी पड़ताल की. सीएस ने बताया कि जो लोग ड्यूटी पर नही आये है उनका एडवांस में कई दिनों का हाजरी बना दिया गया है. निरीक्षण में कई कर्मी अनुपस्थित भी पाए गए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई है जब सीएस अस्पताल पहुंचे थे उस दौरान सिमरी के पीएचसी के प्रत्येक कमरे को अंदर से बन्दकर गार्ड एवं स्वास्थ्य कर्मी नींद में गोते लगा रहे थे. कोई आये जाए उनको कोई फर्क नही पड़ता. घण्टो आग्रह करने के बाद भी किसी ने बल्ड प्रेशर तक चेक करने की जहमत नही उठाई.

रात 11:00 बजे डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे सीएस तो पड़ा दलालों से पाला
सिविल सर्जन रात 11:00 बजे एक आम आदमी की तरह डुमराव अनुमंडलीय अस्पताल में दाखिल हुए यहां बाहर ही जीएनएम बैठे हुए थे. उनके साथ दो अन्य लोग भी बैठे हुए थे जब सिविल सर्जन ने यह कहा कि उनकी तबीयत खराब है और वह चिकित्सक से मिलना चाहते हैं तो जीएनएम के साथ बैठे दो लोगों ने यह कहा कि आज रविवार है और पर्ची नहीं कटेगी ऐसे में उन्हें सुबह आना होगा. सीएस ने बताया कि जो 2 लोग बैठे हुए थे वह देखने से दलाल समझ में आ रहे थे बाद में जब उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत ज्यादा परेशानी नहीं है हल्की-फुल्की परेशानी है तब जीएनएम ने उन्हें चिकित्सक कक्ष का रास्ता दिखा दिया.

नींद में पड़ी खलल तो चिकित्सक ने अनमने ढंग से दी दवा, पर्ची भी नहीं बनाई
सिविल सर्जन ने बताया कि जब वह चिकित्सक कक्ष में पहुंचे तो वहां चिकित्सक टी शर्ट और पैंट पहनकर सोए हुए थे. वह ड्रेस कोड में नहीं थे और जब उनसे यह कहा गया कि उन्हें ब्लड प्रेशर की परेशानी है, जिसके कारण बेचैनी हो रही है तो उन्होंने बिना पर्ची बनाए ही अनमने ढंग से दो टैबलेट्स उनकी तरफ बढ़ा दिया, जिसे लेकर सिविल सर्जन चुपचाप चिकित्सक कक्ष से बाहर निकले और अन्य कक्षों का निरीक्षण किया. इस दौरान अन्य चिकित्सा कर्मी भी बिना ड्रेस कोड का अनुपालन किए सोए पाए गए.

अनुपस्थित मिले प्रभारी उपाधीक्षक, जीएनएम ने बना बना दी थी अग्रिम हाज़िरी
सिविल सर्जन ने बताया कि डुमराव अनुमंडलीय अस्पताल में प्रभारी उपाधीक्षक सुमित सौरभ, जीएनएम सरफराज अहमद तथा शारदा कुमारी अनुपस्थित मिली थी. सरफराज जहां हाज़िरी बनाकर गायब थे वहीं शारदा कुमारी ने तो 2 दिन का एडवांस हाज़िरी बना दी थी. जिसे देख सीएस भौच्चके रह गए. उन्होंने मौके से ही इन सभी से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश मातहतों को दिया.

गौरतलब है कि आधी रात को अस्पताल में मरीज बनकर पहुँचे सीएस को समझते देर नही लगी कि आम आदमी सर पटक कर मर जाये उसके बाद भी उसका इलाज इन अस्पतालों में नही हो सकता. जब तक किसी रसूखदार नेता या अधिकारी का सिफारिश न हो.

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