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टिकट जांच विवाद: मामले की जाँच के लिए कमिटी गठित

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द जनमित्र | शशि

बक्सर रेलवे स्टेशन पर टिकट जांच के नाम पर यात्रियों के साथ बदसलूकी और गैरकानूनी जुर्माना वसूली का मामला अब सुर्खियों में है। यह विवाद इतना बढ़ गया कि पूर्व-मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के डीआरएम जयंत चौधरी को खुद हरकत में आना पड़ा। उन्होंने फौरन इसकी गंभीरता को समझा और एक दो सदस्यीय जांच टीम बना दी, जो अब इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है।


खबर है कि जांच टीम में शामिल दानापुर के मुख्य टिकट निरीक्षक (सीटीआई) निलेश शरण बक्सर पहुंचे। उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के साथ मिलकर स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की छानबीन की और वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए। निलेश शरण ने बताया कि शुरुआती जांच में टिकट निरीक्षक कुंदन कुमार का रवैया रेलवे के नियमों से मेल नहीं खाता दिखा। उनका कहना है कि जल्द ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर बड़े अफसरों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
रेलवे के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुंदन कुमार का नाम पहली बार विवाद में नहीं आया। पहले भी आरा स्टेशन पर यात्रियों से बदतमीजी के चलते उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है। अब बक्सर में फिर से उनके व्यवहार ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार को क्या हुआ था?
शुक्रवार को बक्सर स्टेशन पर टिकट जांच के दौरान माहौल गरमा गया था। दानापुर से आई एक खास टीम ने जांच शुरू की, लेकिन यात्रियों का आरोप था कि सही टिकट होने के बाद भी उन्हें परेशान किया गया। कुछ ने कहा कि उनसे जबरन जुर्माना वसूला गया, तो कई महिलाओं ने शिकायत की कि बिना वजह उन पर फाइन ठोंक दिया गया। स्थानीय आदित्य केसरी ने बताया कि अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहे थे, टिकट दिखाने के बाद भी गालियां सुननी पड़ीं और पैसा वसूला गया। दिलदारनगर के देवानंद सिंह ने कहा कि वो ट्रेन से सिर्फ पानी लेने उतरे थे, लेकिन उन पर एसी कोच में चढ़ने का इल्जाम लगा कर जुर्माना लिया गया। गायक गुड्डू पाठक की भी शिकायत थी कि प्लेटफॉर्म टिकट होने के बावजूद उनसे 900 रुपये ऐंठे गए।
हंगामे के बाद यात्रियों ने स्टेशन पर खूब नारेबाजी की और रेल प्रशासन से सख्त एक्शन की मांग की। इस सबके बीच रेलवे ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन जांच शुरू हो चुकी है। स्टेशन प्रबंधक कमलेश कुमार सिंह भी मौके पर मौजूद थे। यात्रियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा साफ है—वे चाहते हैं कि दोषियों को सबक सिखाया जाए, ताकि आगे से ऐसा न हो। अब सबकी नजर इस जांच के नतीजे पर टिकी है।

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