बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बाद असम कैडर के आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्रा का सपना हुआ चकनाचूर. अधिकारी से नेता बनने का ख्वाब लिए बक्सर पहुँचे दोनों अधिकारियो को सियासत के मैदान में राजनेताओं ने कर दी चारो खाने चित. एक बने कथावाचक तो दूसरे ने सोशल कैम्पेनिग चलाने की कही बात.
द जनमित्र। एस कुमार विमल
बक्सर: 2024 के लोकसभा चुनाव की तिथियो का एलान होने के साथ ही बक्सर लोकसभा सीट पर इंडिया और एनडीए गठबन्धन के नेताओ ने अपने -अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. कयास लगाई जा रही थी कि असम कैडर के तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्रा को भारतीय जनता पार्टी लोकसभा उम्मीदवार बनाएगी लेकिन सियासत के मैदान में राजनेताओं ने एक बार फिर ब्यरोक्रेट्स को चारों खाने चित कर दिया है. जिससे स्थानीय लोगो में भी काफी नराजगी है. हर समाज के लोग आनन्द मिश्रा के समर्थन में सोशल मीडिया पर लगातार कैम्पेनिग चला रहा है. वही मिथलेश तिवारी गो बैक का नारा लिख रहे है. जिससे बक्सर भाजपा के कार्यकर्ता भी असमन्जश में है.

नेताओ के चक्रब्युह में फंस गए दोनों अधिकारी
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले डीजीपी का पद त्यागकर विधायक बनने का सपना लेकर बक्सर पहुँचे गुप्तेश्वर पांडेय को सियासत के मैदान में राजनेताओं ने ऐसा पटकनी दी की नेता बनने का सपना त्यागकर कथावाचक बन गए. 4 साल बाद एक बार फिर वैसी ही स्थिति असम कैडर के कड़क आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्रा की हो गई है. जिन्हें न तो भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार बनाया और न ही कोई संज्ञान ली जिसके बाद अब सोशल कैम्पेनिग कर खुद को स्थापित करने की कोशिश में लगे हुए है.

क्या कहते है आनन्द मिश्रा
सांसद बनने का सपना लेकर बक्सर आये आनन्द मिश्रा से जब पत्रकारो ने सवाल पूछा की न खुदा मिला और न ही महफिले सनम. आप तो कही के नही रहे. जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हम अपने घर आये है और वापस नही जाने वाला हूँ. ऐसा नही है कि प्लेटफॉर्म नही मिला तो जीना छोड़ दूंगा काम करना छोड़ दूंगा. मेरा स्टैंड बिल्कुल साफ है, मैं अपने मिशन पर काम करता रहूंगा. जब आईपीएस की नौकरी छोड़कर आया था तो कई विजन लेकर आया था. मौका ही नही मिला जिसके कारण अपनी काम करने का क्षमता को नही दिखा पाया. छोटे स्तर पर ही सही मैं बक्सर के लोगो के लिए काम करता रहूंगा और अपना प्लेटफॉर्म भी तैयार करूँगा.

गौरतलब है कि सियासत के मैदान में मात खाने के बाद अब असम कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अपना भविष्य तलाशना शुरू कर दिए है. करीबियों की माने तो बक्सर के बच्चों को वह आईपीएस की तैयारी कराने के साथ हो खुद को सामाजिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से मजबूत कर 2025 के चुनावी मैदान में शंखनाद करेंगे.

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