राजनीति

2024 के महासंग्राम के पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्र की एंट्री से दरकने लगी है दोनों गठबन्धन की दीवार

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पूर्व आईपीएस आनंद मिश्र ने 2024 के लोकसभा चुनाव में एंट्री मारकर बढ़ाई एनडीए और इंडिया गठबन्धन के उम्मीदवारों की टेंशन. बक्सर में दरक रहे है दोनों गठबन्धन के दीवार से घबड़ाये उम्मिदवार.

द जनमित्र | सरिता कुमारी

बक्सर : 1 जून को बक्सर लोकसभा सीट पर होने वाले मतदान से पहले ही राजनीति के इस महासंग्राम में असम के लखीमपुर जिले के पूर्व आईपीएस अधिकारी आनन्द मिश्र, ने बक्सर में एंट्री मारकर एनडीए और इंडिया गठबन्धन के दीवारों को दरका दिया है. ताबड़तोड़ सुदूर ग्रामीण इलाकों की सड़कों से लेकर, शहर के चौक चौराहो पर हो रही जनसभाओं ने पूरे बक्सर को आनन्दमय कर दिया है. सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर बढ़ती लोकप्रियता ने सभी पार्टी के उम्मीदवारों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है.

 

युवाओं को खूब भा रहे है पूर्व आईपीएस, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चढ़ा सियासी पारा

बक्सर लोकसभा क्षेत्र में कुल 19 लाख 16 हजार 81 मतदाता हैं. सबसे अधिक ब्राह्मण वोटरों की संख्या है. इसके बाद यादव और राजपूत हैं. इस सीट पर भूमिहार जाति की संख्या भी अच्छी-खासी है. यहां अनुसूचित जाति और अति पिछड़ा की भी संख्या कम नहीं है. बक्सर की सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 4 लाख से ज्यादा है. इसके बाद यादव वोटरों की संख्या 3.5 लाख के करीब है. राजपूत मतदाताओं की संख्या 3 लाख है. भूमिहार मतदाता करीब 2.5 लाख हैं. बक्सर लोकसभा क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी 1.5 लाख के करीब है. इसके अलावा यहां पर कुर्मी, कुशवाहा, वैश्य, दलित और अन्य जातियां भी बड़ी तादाद में हैं.

भितराघात की आशंकाः

एक दशक बाद बीजेपी ने अश्विनी कुमार चौबे की टिकट काटकर मिथलेश तिवारी को, तो राजद ने प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह का टिकट काटकर बक्सर लोकसभा सीट पर सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा है. इन दोनों गठबन्धन के उम्मीदवारों के विजय के रास्ते में इस लोकसभा क्षेत्र में विशेष पकड़ रखने वाले ददन पहलवान एवं लखीमपुर के पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्र ने कई मुश्किलें खड़ा कर दिया है. आलम यह है कि पढ़े लिखे तबके के हर जाति के लोगो के लिए आनन्द मिश्र पहला पसन्द बनते जा रहे है. और सोशल मीडिया से लेकर आमलोगों में वह खूब ट्रेंड कर रहे है.

बीजेपी के बागी नेताओ ने छोड़ा मिथलेश का साथ

बीजेपी के पुराने एवं बागी नेताओ ने वर्तमान एनडीए उम्मीद्वार मिथलेश तिवारी का साथ छोड़ दिया है. बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दू नववर्ष में नवरात्रि के बाद विश्वामित्र मंच के द्वारा नए उम्मिदवार का एलान किया जाएगा. ऐसे में कयास यह लगाई जा रही है कि बीजेपी से निष्कासित बागी नेता आनन्द मिश्रा का समर्थन करेंगे. इधर ददन पहलवान के बढ़ते प्रभाव, एवं भितरघात की आशंका ने सुधाकर सिंह की भी मुश्किलें बढ़ा दिया है. इंडिया गठबन्धन में बक्सर से चुनाव लड़ने की चाह रखने वाले नेता खुलकर समर्थन करते नही दिखाई दे रहे है. जिसका परिणाम है कि वैसे तमाम मतदाताओं की रुझान पूर्व आईपीएस की तरफ बढ़ते जा रहा है.

क्या कहते राजनीति के जानकार

राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर एसएन सिंह एवं अयोध्या यादव की माने, तो अब तक बक्सर लोकसभा सीट से जितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उन सभी में आनंद मिश्रा मतदाताओं के लिए पहला पसंद बनते जा रहे है. वो पार्टियो के विचारधारा रहा है, उस विचारधारा को इस बार की चुनाव में पार्टी के नेताओ ने ही त्याग दिया है. ऐसे में कोर वोटर का रुझान अब पार्टियो से अलग हटकर, पूर्व आईपीएस की ओर बढ़ रहा है. हर उम्र के लोगों को वह प्रभावित कर दिए है. जिस वोट को लेने में जगदाननद सिंह जैसे दिग्गज नेता कामयाब नही हुए, तो सुधाकर और मिथलेश तिवारी को कौन जानता है.

गौरतलब है कि 2024 के महासंग्राम में सभी उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. शरीर को झुलसा देने वाली 42 डिग्री तापमान में सुदूर ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर दौड़ती लग्जरी गाडियों का काफिला यह बताने के लिए काफी है की इस बार का विजय आसान नही है.

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