शिक्षा

मॉडल स्कूलों में नौवीं के दाखिले का बदला नियम

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द जनमित्र डेस्क

जिले के विभिन्न विकासखंडों में स्थित मॉडल स्कूलों में नौवीं कक्षा के प्रवेश नियमों में एक बार फिर बड़ा फेरबदल किया गया है। अप्रैल माह के अंत तक जिन विद्यार्थियों का दाखिला राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा के जरिए हुआ था, उसके बाद से इस पुरानी प्रवेश प्रणाली को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की नई रूपरेखा के मुताबिक, अब छात्र-छात्राओं को प्रवेश सीधे तौर पर उनके द्वारा दिए गए आवेदनों से बनी मेधा सूची के जरिए मिलेगा।

ज्ञात हो कि जिले के ग्यारह प्रखंडों में एक-एक मॉडल स्कूल संचालित हैं, जहां आठवीं पास कर चुके बच्चों को अगली कक्षा में दाखिला मिलता है। शुरुआती दौर में यह फरमान जारी हुआ था कि चयन का आधार केवल उक्त परीक्षा ही होगी। बीच में इस परीक्षा को दोबारा कराने की भी सुगबुगाहट थी, परंतु अब विभागीय अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि दाखिले के लिए कोई भी लिखित परीक्षा नहीं ली जाएगी।

नए सत्र की कक्षाएं अविलंब शुरू करने के उद्देश्य से पूरी प्रवेश कार्यवाही को महज सात दिनों के भीतर निपटाने का निर्देश दिया गया है। इसी कड़ी में स्कूलों ने अपने स्तर पर फॉर्म जमा करना भी शुरू कर दिया है। मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित एमपी उच्च विद्यालय के संस्था प्रधान अरविंद सिंह के अनुसार, प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों से आगामी आठ मई तक फॉर्म मांगे गए हैं। तय समय सीमा के भीतर आने वाले सभी आवेदनों का मूल्यांकन कर एक श्रेष्ठता सूची बनेगी और उसी क्रम में सीटें भरी जाएंगी।

चूंकि हर ब्लॉक का अपना एक ही ऐसा विद्यालय है, इसलिए संपूर्ण विकासखंड ही उसका अधिकार क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में पूरे ब्लॉक का कोई भी पात्र विद्यार्थी वहां दाखिले के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकता है। हालांकि, फॉर्म भरने से पूर्व अभिभावकों और बच्चों को स्कूल से घर की दूरी तथा वहां उपलब्ध संसाधनों का आकलन खुद ही करना होगा।

इस ताजा फैसले से छात्र-छात्राओं को काफी सहूलियत मिलने के आसार हैं क्योंकि अब वे किसी भी अतिरिक्त प्रवेश परीक्षा के तनाव से मुक्त रहेंगे। बहरहाल, सीट पक्की करने के लिए उन्हें केवल एक सामान्य साक्षात्कार के चरण से गुजरना पड़ सकता है।

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