द जनमित्र डेस्क
शहर की यातायात व्यवस्था को तहस-नहस कर देने वाले रेलवे ओवरब्रिज की जर्जर स्थिति का मुद्दा बुधवार को बिहार विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। सदर विधायक आनंद मिश्रा ने सदन में इस गंभीर जन समस्या को उठाते हुए सरकार से तुरंत उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

विधायक ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक ओवरब्रिज पर यातायात पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता, तब तक आम लोगों की सुविधा के मद्देनजर नीचे वाला रेलवे फाटक तत्काल खोल दिया जाए।
आनंद मिश्रा ने सदन को बताया कि बक्सर रेलवे ओवरब्रिज शहर की धड़कन की तरह है। इसके बंद होने से न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि आसपास के इटाढ़ी, राजपुर, रोहतास समेत कई इलाकों के निवासियों का रोजमर्रा का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। जिला मुख्यालय आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 5 जून को ओवरब्रिज का एक स्लैब अचानक धंस गया था। इसके बाद सुरक्षा को देखते हुए पूरे पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया गया। घटना के समय प्रशासन ने दावा किया था कि मरम्मत का काम 15 दिनों में पूरा कर पुल को फिर से खोल दिया जाएगा। लेकिन एक महीने से ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद मरम्मत अधर में लटकी हुई है और पुल अब भी बंद पड़ा है।
इससे आमजन की परेशानी और बढ़ गई है। पहले पुल बंद होने पर लोग नीचे वाले रेलवे फाटक का सहारा ले लेते थे, लेकिन रेलवे प्रशासन ने अब उस फाटक को भी स्थायी रूप से बंद कर दिया है। नतीजतन, आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बक्सर पहुंचने के लिए लंबा घुमावदार रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और पेट्रोल-डीजल दोनों की बर्बादी हो रही है।
बता दें कि बक्सर रेलवे स्टेशन के पास बना यह ओवरब्रिज शहर को रेलवे लाइन के दोनों तरफ बसे इलाकों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। इसका मुख्य उद्देश्य रेलवे फाटक बंद होने पर होने वाले लंबे जाम से राहत दिलाना था। पुल बनने के बाद लोगों को काफी सुविधा मिली थी, लेकिन अब पुल और फाटक दोनों बंद होने से पुरानी समस्या फिर से उभर आई है।
विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद आनंद मिश्रा ने सरकार से मांग की है कि पुल की निर्माण गुणवत्ता और क्षति की पारदर्शी जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और आम लोगों की सुविधा के लिए फाटक तुरंत खोल दिया जाए। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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