अपराध

नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में शिक्षक गिरफ्तार

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द जनमित्र डेस्क

बिहार के बक्सर जिले में एक सरकारी स्कूल से जुड़ी नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म की शिकायत और कथित वीडियो के वायरल होने के मामले की जांच अब सीआईडी के हवाले कर दी गई है। कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के इस प्रकरण में पुलिस ने पहले स्कूल के प्रधानध्यापक को हिरासत में लिया था। अब मुख्य आरोपी शिक्षक अरविंद कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि जिले के पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने की है। आरोपी को सख्त सुरक्षा घेरे में थाने लाया गया है जहां उसकी पूछताछ चल रही है।

इस घटना में स्कूल के प्रधानध्यापक इमाम अली अंसारी, मुख्य आरोपी अरविंद कुमार और एक अन्य शिक्षक विरेंद्र कुमार के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। पुलिस बताती है कि जांच कई स्तरों पर तेज कर दी गई है। एक और शिक्षक समेत कई अन्य व्यक्तियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एक आरोपी अभी भी फरार है।

पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य खुद थाना पहुंचकर घटना की पूरी जानकारी हासिल करने के बाद कार्रवाई तेज करवाई। मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए रातभर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई। उसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। एसपी ने बताया कि दूसरे आरोपी शिक्षक को पकड़ने के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है और फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।

कथित वीडियो ने जांच को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में जिस होटल के कमरे का जिक्र है उसकी पहचान के लिए पुलिस टीम ने रातभर करीब आधा दर्जन होटलों में छापेमारी की। फॉरेंसिक टीम भी शामिल की गई है। डिजिटल साक्ष्य, वीडियो के स्रोत और उसके प्रसार की कड़ी की जांच चल रही है। अभी तक उस कमरे की पक्की पहचान नहीं हो सकी है जहां से वीडियो रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है।

जांच के दौरान एक आरोपी शिक्षक पर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का पुराना आरोप भी सामने आया है। शिक्षा विभाग से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस शिक्षक की डिग्री को लेकर पहले भी विभागीय जांच हुई थी। कथित संस्थान की वैधता और प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर गड़बड़ियां पाई गई थीं। जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण ने इस पर कहा कि बिना फाइल देखे कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जा सकती। फाइल देखने के बाद ही विभाग स्थिति साफ करेगा।

मामले ने तब और विवाद पैदा किया जब उसी स्कूल के प्रधानध्यापक का नाम शिक्षक दिवस पर राजकीय सम्मान की सूची में सामने आया। गंभीर आरोपों के बीच सम्मान का प्रस्ताव विभागीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने लगा। विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने नाम सूची से हटाने की कार्रवाई की। शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने कहा कि इस घटना से पूरा बिहार शर्मसार हुआ है। ऐसे गंभीर आरोप वाले स्कूल के शिक्षक को सम्मानित करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

स्थानीय लोग अब प्रशासन और शिक्षा विभाग से कई सवाल पूछ रहे हैं। सम्मान के लिए नाम किस स्तर पर अनुशंसित किया गया? पृष्ठभूमि जांच हुई या नहीं? ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानध्यापक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर स्कूल से जुड़े इतने गंभीर आरोप हैं तो उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? शिक्षा विभाग की ओर से अगर यह कहा जाता है कि संबंधित छात्रा उस स्कूल की नहीं थी तो फिर वायरल वीडियो और आरोपों की सच्चाई क्या है?

पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वीडियो की उत्पत्ति, रिकॉर्डिंग की जगह, वायरल होने की परिस्थितियां, मोबाइल और डिजिटल सबूत तथा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है जबकि दूसरे की तलाश जारी है। एसपी की निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है और शिक्षा विभाग से जुड़े कई सवाल भी अब जांच के घेरे में आते दिख रहे हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़े सवाल अभी अनुत्तरित हैं। नाबालिग छात्रा से जुड़े आरोप कितने सही हैं? कथित वीडियो कहां और कैसे बना? इसे फैलाने के पीछे कौन था? सभी नामजद लोगों की असल भूमिका क्या रही? शिक्षक के फर्जी प्रमाणपत्र का आरोप सही है तो पहले की विभागीय जांच में क्या निकला और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सबके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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