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सम्राट अशोक जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा

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द जनमित्र डेस्क

चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर कुशवाहा महासंघ ने भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया। इस शोभायात्रा ने पूरे शहर को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक उत्साह से भर दिया।

शोभायात्रा की शुरुआत पिप्पली बुद्ध विहार स्थित भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा से हुई। यह विशाल जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए वापस बुद्ध विहार पहुंचा, जहां एक विचार गोष्ठी के साथ इसका समापन हुआ।

जिले के विभिन्न गांवों से हजारों लोग इस भव्य आयोजन में शामिल हुए। शोभायात्रा में सबसे आगे एक आकर्षक रथ पर सम्राट अशोक की बड़ी तस्वीर सजी हुई थी। दूसरे रथ पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा के साथ भंतेगण विराजमान थे।

चार अन्य रथों, दर्जनों घोड़ों, सैकड़ों चारपहिया वाहनों और करीब एक हजार मोटरसाइकिल सवारों ने शोभायात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया। हाथों में झंडे और पताकाएं लिए हजारों लोग पैदल चल रहे थे। पूरे रास्ते “सम्राट अशोक अमर रहें” जैसे नारों से शहर गूंज उठा।

शोभायात्रा रेलवे स्टेशन, ज्योति प्रकाश चौक, मॉडल थाना, पिपरपाती रोड, अस्पताल रोड, मेन रोड, यमुना चौक, पुलिस चौकी, कॉलेज गेट और जेल पाइन रोड से होते हुए पिप्पली बुद्ध विहार पहुंची। मार्ग के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।

समापन के बाद आयोजित विचार गोष्ठी की अध्यक्षता अभिमन्यु कुशवाहा ने की। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज में भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता बढ़ रही है, ऐसे में सम्राट अशोक के विचारों को फिर से जीवित करना बहुत जरूरी है।

अभिमन्यु कुशवाहा ने अपने संबोधन में बताया कि सम्राट अशोक ने यह संदेश दिया था कि असली शक्ति शस्त्रों में नहीं, बल्कि करुणा, धर्म और न्याय में होती है। युद्ध की भयावहता को समझने के बाद उन्होंने अहिंसा का मार्ग चुना और पूरे विश्व में शांति एवं मानवता का संदेश फैलाया। उनका जीवन भारत समेत पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सम्राट अशोक के त्याग, बलिदान और मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना था, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरित हो सके। इस दौरान राष्ट्रीय धरोहरों के संरक्षण और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प भी लिया गया।

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