2024 के लोकसभा चुनाव में जातीय जनगणना के बहाने जातीय ताकत दिखाने की बिहार में होगी बड़ी कोशिश, जनगणना के बहाने जातीयो की वोट बैंक पर है राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की निगाहे, जातीय जनगणना नही जातियों की संख्याबल पर है बिहार सरकार की नजर.
उमेश पाण्डेय | द जनमित्र
बक्सरः देश मे होने वाले लोकसभा चुनाव में भले ही अभी पांच महीने की देर है लेकिन बिहार में जातीयों के बीच अपना पैठ बनाने के लिए, क्षेत्रीय दलों ने अभी से ही जातीयों का राग अलापना शुरू कर दिया है. बिहार में जिस गंगा जमुनी तहजीब की बाते हमारे समाजवादी और वामदल करते आये है वह बिहार अभी भी जातीय जकड़न से मुक्त नही हो पाया है और यही कारण है कि जातीय जनगणना के आड़ में जदयू के नेता नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जातियों का संख्या बल जानकर जो आज हिन्दू के नाम से जाने जाते है उन्हें कई टुकड़ो में तोड़कर उसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहते है. उसके पीछे का मकसद उनका विकास करना नही है बल्कि जाती के नाम पर वोट का खेल खेलना है

तीन दशक से यही तो कर रहे है राज फिर भी क्यो नही हुआ विकास
जातिय जनगणना के बाद वैज्ञानिक तरीके से समाज में पिछड़े हुए लोगों को आरक्षण देकर उनके विकास करने की बात आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कर रहे हैं. पिछले तीन दशक से उस बिहार पर वही लालू ,राबड़ी औऱ नीतीश कुमार अब तक राज करते आये है जब 33 सालों में उनके लिए कुछ नही कर पाए, तो पांच महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले क्या कर लेंगे. केवल जाती के नाम पर समाज को तोड़कर उसका सियासी लाभ उठाने की यह क्षेत्रीय दलों की कुटिल चाल है.
जातीय जनगणना की आड़ में 2024 की लड़ाई को धार देने की कोशिश में जदयू
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई को धार देने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू पोल खोल अभियान चलाएगी. एक सितंबर से जेडीयू बीजेपी के खिलाफ ‘पोल खोल’ अभियान शुरू करेगी इसके साथ ही पार्टी 1 से 5 सितंबर तक सभी जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस और 7 से 12 सितंबर तक कैंडल मार्च का आयोजन करेगी. पार्टी 15 से 20 सितंबर तक घरों पर काले झंडे लगाकर बीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी. आपको बता दें कि जदयू इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही सबसे पहले इसकी पहल की थी. अब बीजेपी जातीय जनगणना की विरोधी है. इसको मुद्दा बनाकर जदयू जातियों का वोट बैंक साधने की फिराक में है.
ओबीसी की वोट बैंक पर टिकी है सभी की निगाहें
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार की जनसंख्या 10.38 करोड़ थी. इसमें 82.69% हिंदू और 16.87% आबादी मुस्लिम समुदाय की है. वहीं हिंदू जनसंख्या में 17% सवर्ण, 51% ओबीसी, 15.7% अनुसूचित जाति और करीब 1 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति है. एक आकलन के अनुसार बिहार में 14.4% यादव समुदाय, कुशवाहा यानी कोइरी 6.4%, कुर्मी 4% हैं. सवर्णों में भूमिहार 4.7%, ब्राह्मण 5.7%, राजपूत 5.2% और कायस्थ 1.5% हैं.
इंडिया गठबन्धन के नेता ऐसे बुन रहे है जीत का सेहरा
2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की जीत के लिए महागठबन्धन के नेताओं ने सेहरा बुनना शुरू कर दिया है. डुमराँव विधानसभा क्षेत्र से भाकपा माले विधायक अजित कुमार सिंह ने बताया कि बीजेपी के पास जितना वोट प्रतिशत है उससे अधिक देश के तमाम विपक्षी पार्टियो का वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो हो जाएगा और हम आसानी से बीजेपी को चुनाव हरा देंगे. चुनाव जीतने के बाद संख्या बल के आधार पर हम सदन में अपना नेता भी चुन लेंगे.

राहुल गांधी से नही बड़ा है कोई समाजवादी नेता
वहीं कांग्रेस विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी की माने तो, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से बड़ा समाजवादी नेता पूरे देश मे नही है. आज राहुल गांधी किसानों के खेतो, खलिहानों तक पहुँचकर उनकी चिंता कर रहे हैं. गरीबों का चिंता कर रहे हैं. हमारे पास तो पहले से राहुल गांधी का चेहरा उपलब्ध है और उनके नेतृत्व में 2024 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी का हैट्रिक लगाना तो दूर की बात है पूरे देश में 50-60 सीटों पर बीजेपी सिमट जाएगी.
बीजेपी का तंज
2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के नेताओं के द्वारा पकाया जा रहे ख्वाबी पुलाव पर स्थानीय भाजपा सांसद सह भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने तंज कसते हुए कहा कि 2024 में पीएम पद पर कोई वैकेंसी नहीं है जिस गठबंधन का कोई दूल्हा ही नहीं है वह नरेंद्र मोदी को रोकने की बात कर रहा है. ये बिना पेंदी के लोटा जो भ्रष्टाचार और खांदानवाद से उपर नही उठ पाए वह देश की क्या सेवा करेंगे.

गौरतलब है कि देश की तमाम राजनीतिक पार्टी के नेताओ की निगाहें ओबीसी वोट बैंक पर टिकी हुई है. 2014 और 2019 में यह वोट बैंक जिस तरह से नरेंद्र मोदी पर अपना भरोसा जताया है उस वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए विपक्ष हर सम्भव कोशिश कर रहा है.

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