द जनमित्र न्यूज डेस्क
भू-हदबंदी अधिनियम के तहत बिहार सरकार द्वारा डुमराँव में अर्जित की गयी भूमि पर अभी भी जमीन्दारों के कब्जे में है। यह प्रश्न डुमरांव विधायक डॉ० अजीत कुशवाहा द्वारा विधानसभा के बजट सत्र 2025 के प्रश्नोत्तर काल में उठाया गया।
बिहार सरकार ने 1997 में ही गजट जारी कर बिहार भू-हदबंदी अधिनियम के तहत बक्सर जिले के मौजा भोजपुर में 65.95 एकड़ की भूमि डुमराँव महराज के परिवार से अर्जित की थी। लेकिन आज तक उनकी जमाबंदी रद्द नहीं की गयी है। जमाबंदी रद्द नहीं होने की वजह से डुमराँव महराज के परिवार के सदस्यों ने अर्जित जमीन के कुछ हिस्से को बेच भी दिया गया है और बाकी बची जमीन के बड़े भू-भाग पर अभी भी रैयत का ही कब्ज़ा है।


डुमरांव विधायक ने कहा कि उनके बार-बार सवाल उठाने के बावजूद भी सरकार अपने गजट से अर्जित जमीन को कब्जे में लेकर उपयोग करने में सक्षम नहीं है इससे यह जाहिर है कि सरकार आज भी जमीन्दारों के पक्ष में खड़ी है। उन्होंने बताया कि जनसंपर्क के दौरान हमें दलित समुदाय के भूमिहीन पर्चाधारियों ने शिकायत की थी कि बीसियों वर्षों से परचा तो मिला है परन्तु परचा के भूमि पर दूसरों का कब्ज़ा है।
विधानसभा में सवाल पूछने पर मंत्री झूठा जवाब देते हैं और इन बातों से साफ़ मुकर जाते हैं। इससे नीतीश सरकार की दलित-गरीब विरोधी मंशा साफ दिखाई पड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया राज्य में नीतियाँ व कानून के दोहरे मापदंड हैं – अमीर व गरीब सरकार की नजर में एक जैसे नहीं है।

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