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गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से मिले भाकपा माले के नेता

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द जनमित्र डेस्क

हाल ही में बक्सर जिले के नवानगर प्रखंड के अंतर्गत कुकुरभुक्का गांव में एक नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप की दिल दहला देने वाली घटना हुई। इस अपराध ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया। इस घटना में बलात्कार के बाद अपराधियों ने पीड़िता पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या करने की कोशिश की। गनीमत रही कि किसी तरह पीड़िता की जान बच गई, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है।

इस घटना के बाद आज ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेन एसोसिएशन (ऐपवा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (भाकपा माले) के नेताओं ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने घटना की विस्तृत जानकारी ली और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। नेताओं ने इस जघन्य कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की। पीड़िता के परिजनों ने बताया कि वे अभी भी सदमे और डर की स्थिति में हैं, क्योंकि इस अपराध को अंजाम देने वाले दोषी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इस बीच, जांच टीम और संगठनों ने सरकार से कई मांगें रखी हैं, जिनमें पीड़िता का सरकारी खर्च पर इलाज, सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा सुनिश्चित करना और पीड़िता को उचित मुआवजा देना शामिल है।

बिहार में इस तरह की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, जिससे महिलाएं और बच्चियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बक्सर की यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है; राज्य के अन्य हिस्सों से भी ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और लोग अपने बच्चों, खासकर बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन नीतीश सरकार को घेर रहे हैं और इसे प्रशासनिक विफलता का सबूत बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार अपराध रोकने में नाकाम रही है और अपराधी बिना किसी डर के खुले आम घूम रहे हैं। कुकुरभुक्का की घटना के बाद स्थानीय लोग भी गुस्से में हैं और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिलती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।

नीतीश सरकार पर यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई सख्त कार्रवाई या नीतिगत बदलाव देखने को नहीं मिला है। बिहार की जनता, खासकर महिलाएं, अब यह सवाल पूछ रही हैं कि आखिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? जब तक इस तरह के अपराधों पर लगाम नहीं लगती, तब तक नीतीश कुमार का महिलाओं को सशक्त बनाने का दावा केवल खोखला ही नजर आएगा। बक्सर की इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था की बदहाली को एक बार फिर उजागर कर दिया है और सरकार से तत्काल एक्शन की जरूरत को रेखांकित किया है।

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