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मृत बेटे की स्मृति में हिंदू परिवार ने कायम की भाईचारे की अनूठी मिसाल

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द जनमित्र डेस्क

सड़क हादसे में बेटे की असमय मौत से टूटे एक हिंदू परिवार ने दर्द को मानवता की मिसाल में बदल दिया है। बिहार के रोहतास जिले के चौसा प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत डेवी डीहरा गांव में जनार्दन सिंह और उनके परिवार ने बेटे शिवम कुमार की याद में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बीघा जमीन दान कर दी, जो कब्रिस्तान के रूप में विकसित होगी। यह कदम पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक माना जा रहा है।

श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान सोमवार को लिया गया यह फैसला न सिर्फ परिवार की पीड़ा को परोपकार में बदलने का उदाहरण है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता की भावना को मजबूत करने वाला भी। मृतक शिवम के चाचा बृजराज सिंह ने बताया, “कब्रिस्तान का नामकरण ‘शिवम उर्फ अहीर धाम कब्रिस्तान’ किया जाएगा। शिवम के विचारों में हमेशा आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना थी। उसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए परिवार ने यह निर्णय लिया है, ताकि शिवम की स्मृति आने वाली पीढ़ियों के बीच इंसानियत की कहानी बनकर जिंदा रहे।”

18 नवंबर को उत्तराखंड के देहरादून में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में 25 वर्षीय शिवम कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के अनुसार, शिवम देहरादून में तीन फैक्टरियां संचालित कर रहा था और वह घर का इकलौता सहारा था। इस साल उसकी शादी की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं। चाचा बृजराज सिंह ने बताया, “शिवम न सिर्फ परिवार की रीढ़ था, बल्कि गांव और समाज के प्रति उसकी सोच बेहद सकारात्मक थी। वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहता था। उसकी मौत से परिवार ही नहीं, पूरा गांव शोक में डूबा है।”

पुलिस के मुताबिक, शिवम दफ्तर के काम से बाइक पर जा रहा था जब एक तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे ने परिवार पर मानो पहाड़ टूटने का असर किया। परिजनों का कहना है कि शिवम की असमय विदाई को स्वीकार करना उनके लिए असंभव था, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने दुख को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लिया।

श्राद्ध के अवसर पर परिवार ने न केवल जमीन दान की, बल्कि शिवम की स्मृति में पौधरोपण भी किया। बृजराज सिंह ने कहा, “ये पौधे शिवम के आदर्शों और उसके सौहार्दपूर्ण स्वभाव का प्रतीक बनकर बढ़ते रहेंगे। यह जमीन पूरी तरह मुस्लिम समाज के सुपुर्द रहेगी, और हम चाहते हैं कि यह सद्भाव का केंद्र बने।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दान हिंदू-मुस्लिम एकता का अनोखा संदेश है। जिले भर में इसकी सराहना हो रही है, और कई लोग इसे सामाजिक सद्भाव की नई मिसाल बता रहे हैं। चौसा प्रखंड विकास अधिकारी ने भी इस पहल की प्रशंसा की है, जो आने वाले दिनों में गांव में सामुदायिक एकता को और मजबूत करेगी।

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