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लंबित भुगतानों से खफा जिला परिषद सदस्य ने की आत्मदाह की कोशिश

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द जनमित्र डेस्क

जिला समाहरणालय परिसर में शनिवार को उस वक्त अफरातफरी मच गई जब विरोध प्रदर्शन कर रहे एक जिला परिषद सदस्य ने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर जान देने की कोशिश की। गनीमत रही कि वहां मौजूद सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उक्त प्रतिनिधि को फौरन काबू में कर लिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जिले में रुके हुए विकास कार्यों के भुगतान और फंड के इस्तेमाल में हो रही देरी से खफा जनप्रतिनिधि लंबे समय से आक्रोशित हैं। इसी सिलसिले में उप विकास आयुक्त के साथ उनकी मंत्रणा चल रही थी। बातचीत के दौरान ही जिप सदस्य राजीव कुमार ने अचानक खुद को आग के हवाले करने की नीयत से अपने शरीर पर केरोसिन डाल लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

इस वाकये के बाद प्रशासनिक परिसर का माहौल काफी गरमा गया और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। राजीव कुमार को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में अन्य सदस्यों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। जब पुलिस की गाड़ी उन्हें लेकर निकलने लगी, तो साथी प्रतिनिधियों ने वाहन का घेराव कर दिया और गाड़ी के आगे सड़क पर बैठ गए। काफी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद पुलिस ने रास्ता खाली करवाया और गाड़ी को आगे बढ़ाया।

आक्रोशित सदस्यों ने पुलिस पर गंभीर इल्जाम भी लगाए हैं। उनका कहना है कि इस गहमागहमी के बीच पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस आरोप पर जिला प्रशासन के किसी भी वरीय अधिकारी का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया था।

इस पूरे विवाद की जड़ विकास निधियों का रुका होना है। पंचायत प्रतिनिधियों का दावा है कि जिले के विकास कार्यों के लिए आवंटित 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का अब तक कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसके अलावा पहले से पूरे हो चुके कार्यों का पैसा भी अटका पड़ा है। जिप सदस्य पूजा कुमारी के मुताबिक, यह आम करदाताओं की गाढ़ी कमाई है जिसे जनता के हित में खर्च होना चाहिए। फंड के अभाव में जमीनी स्तर पर विकास के काम पूरी तरह बाधित हैं और इसका सीधा नुकसान आम अवाम को उठाना पड़ रहा है।

विदित हो कि इन्हीं मांगों को लेकर ये सदस्य पहले भी बेमियादी धरने पर बैठे थे, जिसे विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण स्थगित कर दिया गया था। राजीव कुमार ने अपने इस चरम कदम की वजह प्रशासन की हठधर्मिता और लगातार हो रही अनदेखी को बताया है।

वहीं, इस पूरे प्रकरण पर जब उप विकास आयुक्त निहारिका छवि का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने विभागीय व्यस्तता का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से मना कर दिया। फिलहाल, समाहरणालय की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आला अधिकारी इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।

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