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गंगा की बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें, अंतिम संस्कार के लिए जद्दोजहद

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर: मिनी काशी के नाम से मशहूर बक्सर में गंगा नदी के उफान ने जिले के कई इलाकों को बाढ़ की चपेट में ले लिया है। चरित्रवन स्थित मुक्ति धाम में भी पानी घुस गया है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा घाट से करीब 100 मीटर दूर एक छोटे से स्थान पर शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है, लेकिन चिता की राख को गंगा में विसर्जित करना असंभव हो गया है। निर्माणाधीन इलेक्ट्रिक शव दाह गृह का कार्य भी बाढ़ के कारण ठप हो गया है। लोग अब निर्माण सामग्री जैसे गिट्टी और बालू को हटाकर जैसे-तैसे शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

लकड़ियों की कीमतों में उछाल, लोग परेशान
मुक्ति धाम पर रोजाना 30-40 शवों का अंतिम संस्कार होता है, जहां बक्सर के अलावा रोहतास, कैमूर, भोजपुर और उत्तर प्रदेश से भी लोग पहुंचते हैं। बाढ़ के कारण जगह की कमी और लकड़ियों की बढ़ती कीमतों ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। पहले 450 रुपये प्रति मन (40 किलो) में मिलने वाली लकड़ियां अब 500 रुपये में बिक रही हैं। बारिश के कारण सूखी लकड़ियों को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो गया है।

पानी और महंगी लकड़ियों ने बढ़ाई परेशानी

रोहतास जिले के क्वाथ गांव से आए रामू कुमार ने बताया, “शव लेकर आए तो बहुत मुश्किल हुई। लकड़ियां गीली हैं और महंगी भी। जहां पहले शव जलाए जाते थे, वहां पानी भर गया है। जगह की कमी के बावजूद, जैसे-तैसे अंतिम संस्कार करके लौटना पड़ रहा है।” वहीं, श्याम बिहारी राम ने कहा कि गंगा का बढ़ता जलस्तर शव जलाने में बड़ी बाधा बन रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शव दाह गृह का निर्माण पूरा होने पर यह समस्या कम हो सकती है।

घाट की दुकानें भी ऊपर शिफ्ट, रास्ते में अड़चन

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने मुक्ति धाम के घाट को पूरी तरह डुबो दिया है। शव दाह के लिए निर्धारित स्थान पानी में डूब चुका है, जिसके चलते अब निर्माणाधीन शव दाह गृह परिसर में शव जलाए जा रहे हैं। घाट पर लगने वाली दुकानें भी ऊपर शिफ्ट हो गई हैं, और लकड़ियों को रास्ते के दोनों तरफ रखा गया है, जिससे रास्ता संकरा हो गया है। इससे लोगों को नीचे जाने में दिक्कत हो रही है।

डीएम ने दिए निर्देश

बक्सर के डीएम विद्यानंद सिंह ने बीते दिन मुक्ति धाम का दौरा कर व्यवस्थित तरीके से शवों का अंतिम संस्कार कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, बाढ़ की स्थिति और सीमित संसाधनों के बीच लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर कम होने और शव दाह गृह के निर्माण पूरा होने तक यह मुश्किलें बरकरार रहेंगी।

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