जनमित्र/बक्सरः रशलसरी ट्रस्ट द्वारा डॉ रामचंद्र सिंह का तीसरा परिनिर्वाण दिवस कोइरपुरवा में मनाया गया। उक्त अवसर पर चन्द्रेश्वर बौद्ध एवम बुद्धप्रिय ने उपस्थित लोगों को नमन, बुद्ध वंदना त्रिशरण, पंचशील ,और परित्राण पाठ कराया एवं समाज मे बढ़ते बाजारवाद के कारण दुख और निवारण एवम जीवन एक संघर्ष पर विचार विमर्श भी आयोजित किया गया। साथ ही बुनियादीय विद्यालय बक्सर में डॉ रामचंद्र सिंह के स्मृति में पर्यावरण दिवस पर लगाए गए पौधों का संरक्षण एवं सम्वर्धन ,साफ सफाई औऱ जल देकर किया गया। शाम को हावड़ा नव ज्योति संस्थान ,बक्सर से जुड़े बच्चों को प्रखंड के हरिकिशुनपुर गॉव में अन्नपूर्णा कार्यक्रम भी किया गया। उक्त अवसर पर विमर्श साझा करते हुए पूर्व निदेशक डॉ आर.के. सिंह ने कहा कि डॉ रामचन्द्र सिंह का जीवन संघर्षों की एक गाथा है। ये कठिन परिस्थितियों में भी विचलित नही होते थे उनमें समन्वय की अदभूत कला थी।
इन्होंने होमियोपैथी पद्धति से मानव जीवन और पशु जीवन की लगातार सेवा करते रहे हैं इन्होंने कई असाध्य रोगों का इलाज भी किया है। सत्य शोधक संस्थान के राष्ट्रीय अध्य्क्ष शिवप्रसाद सिंह ने कहा कि बढ़ते बाजारवाद ने मनुष्य के जीवन मे दुखों की विभिन्न परिस्थितियों पैदा की है और कर रही है। इच्छाए भी अनियंत्रित होती जा रही है जो दुःख का कारण बनती है अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करना ही होगा तभी जीवन सुखी हो सकता है।वर्त्तमान भारत में महामानव गौतम बुद्ध की विचारों की प्रांसगिकता बढती जा रही है।भारत को बुद्ध मय होना होगा तभी इसका गौरवशाली अतीत लौट सकता है। उक्त अवसर के संबोधन पर डॉ सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि बुद्ध ने चार आर्य सत्य दुनिया को बताया है,दुःख है,दुःख का कारण है ,दुःख का निवारण है,निवारण का आष्टांगिक मार्ग है । बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग पर चल कर जीवन को सुखी बनाया जा सकता है वही शिक्षक नेता सुरेन्द्र प्रताप सिंह कहा कि बुद्ध कि विचारधारा प्रकृतिक और वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधरित है।
उक्त कार्यक्रम में अखिल भारतीय सत्यशोधक संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सिंह ,नारियल विकास बोर्ड के पूर्व निदेशक डॉ आर के सिंह , शिक्षक संघ के नेता सुरेंद्र प्रताप सिंह, विकास कुमार ,आलोक कुमार, नीलम कुमारी ,रीता कुमारी ,इंदुशेखर प्रसाद ,रवि कुमार प्रकाश कुमार ,बब्बन सिंह ,संजय सिंह , हावड़ा नव ज्योति संस्थान के विजय खरवार ने भूमिका महत्त्वपूर्ण रही ।

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