द जनमित्र | शशि
बक्सर में बन रहे 1320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट की रफ्तार का जायजा लेने के लिए एसजेवीएन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूपेंद्र गुप्ता वहां पहुंचे। दो दिनों के दौरे पर आए भूपेंद्र गुप्ता ने परियोजना स्थल का हर कोना छान मारा। वहां पहुंचते ही सीआईएसएफ के जवानों ने उन्हें सलामी ठोकी।




एसटीपीएल के सीईओ विकास शर्मा ने भूपेंद्र गुप्ता का स्वागत हिमाचली टोपी और फूलों के गुलदस्ते के साथ किया। भूपेंद्र गुप्ता ने दौरा शुरू किया और मेक-अप वाटर पंप हाउस, गति शक्ति मल्टी कार्गो टर्मिनल, कोल हैंडलिंग प्लांट से लेकर मुख्य संयंत्र के कंट्रोल रूम और जलाशय तक हर चीज को बारीकी से देखा। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि काम तय वक्त पर पूरा हो, कोई ढिलाई न बरती जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी और कोयले की सप्लाई का इंतजाम पक्का होना चाहिए, ताकि आगे चलकर कोई अड़चन न आए। निरीक्षण के बाद उन्होंने एसटीपीएल, एनटीपीसी और एल एंड टी के बड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। वहां निर्माण की राह में आने वाली मुश्किलों पर खुलकर बात हुई और सभी को एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर काम करने की हिदायत दी गई।
बक्सर जिला प्रशासन से मिलते वक्त उन्होंने परमिशन की प्रक्रिया को आसान करने और लोकल परेशानियों को सुलझाने में मदद की गुजारिश की। उनका मानना है कि ये प्रोजेक्ट बिहार के ऊर्जा सेक्टर की रीढ़ साबित होगा। सस्ती बिजली के साथ-साथ इलाके के विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी।
दरअसल, बक्सर के चौसा गांव में ये कोयले से चलने वाला थर्मल पावर प्लांट तैयार हो रहा है। इसकी नींव 2013 में तब पड़ी, जब एसजेवीएन ने बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी और बिहार इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के साथ हाथ मिलाया। मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था। 11 हजार करोड़ की लागत से बन रहे इस प्लांट का ठेका एल एंड टी के पास है। दो यूनिट्स, 660-660 मेगावाट की, लगभग तैयार होने को हैं और जुलाई 2025 से बिजली पैदा करने का प्लान है। अब ये प्रोजेक्ट अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है।

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