द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र अंतर्गत अरियांव पंचायत स्थित नथुनी अहीर का डेरा मध्य विद्यालय (डुमरांव प्रखंड) से एक गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय के दो शिक्षकों—अरविंद कुमार और वीरेंद्र प्रसाद—पर नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़खानी, यौन शोषण, आपत्तिजनक वीडियो बनाने-वायरल करने तथा ऑडियो के जरिए धमकी देने के आरोप लगे हैं। शिक्षा विभाग ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में है।

ग्रामीणों और अभिभावकों की शिकायत के अनुसार, शिक्षकों ने छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार किया। सबसे गंभीर आरोप अरविंद कुमार पर है कि उन्होंने एक नाबालिग छात्रा को होटल ले जाकर दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो वायरल किया। वीरेंद्र प्रसाद पर भी आपत्तिजनक वीडियो बनाने व प्रसारित करने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिक्षक फोन करके अन्य छात्राओं को भी बुलाने को कहते थे और यह सिलसिला कई महीनों से चल रहा था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही परिजनों व ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली। आरोपों में एक दर्जन नाबालिग छात्राओं के कथित यौन शोषण का भी जिक्र है।
शिकायत पर 31 अगस्त 2026 को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ), डुमरांव ने जिला शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजी। समीक्षा के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर दोनों शिक्षकों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत 2 सितंबर को अलग-अलग आदेशों से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में वीरेंद्र प्रसाद का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, राजपुर तथा अरविंद कुमार का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, चक्की निर्धारित किया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, आरोप सरकारी सेवक के पद व आचरण के प्रतिकूल हैं। दोनों के खिलाफ आरोप पत्र गठित कर विभागीय जांच शुरू की जाएगी, जिसमें संचालन व उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। जांच में साक्ष्य, बयान आदि पर विचार होगा और दोष सिद्ध होने पर बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई भी संभव है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार कर्ण (इंद्र कुमार कर्ण) ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने और विद्यालय का माहौल खराब करने के आरोप सही पाए गए। अरविंद कुमार की नियुक्ति 2024 में बीपीएससी के माध्यम से टीआरई-2 के तहत हुई थी और वे इस विद्यालय में पदस्थापित थे।
इसी बीच विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी का नाम राजकीय पुरस्कार के लिए भेजी गई सूची में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। डीईओ के अनुसार, यह नामांकन घटना सामने आने से पहले हो चुका था। प्रधानाध्यापक पर इस मामले में कोई आरोप नहीं है और शिक्षकों के कथित व्यक्तिगत आचरण के लिए उन्हें सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा रहा। फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि पुरस्कार चयन में विद्यालय के अनुशासन, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और छात्राओं की सुरक्षा जैसे पहलुओं को कितना वजन दिया जाता है। नामांकन की दोबारा समीक्षा होगी या पूर्व प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
कृष्णाब्रह्म थाना के नवपदस्थापित थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि ग्रामीण आवेदन तैयार कर रहे हैं। आवेदन मिलने पर वीडियो, ऑडियो व अन्य साक्ष्यों सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। वीडियो के आधार पर छात्रा की पहचान हो चुकी है। परिजनों व छात्रों के बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस यह भी देखेगी कि आपत्तिजनक सामग्री कैसे बनाई और प्रसारित की गई।
इस मामले के खुलासे के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। अभिभावक व ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने आरोपों को प्रथम दृष्ट्या गंभीर माना है, लेकिन अंतिम सत्य विभागीय व कानूनी जांच के बाद ही सामने आएगा। यह मामला विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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