शनिवार को बक्सर पहुचेंगे बीजेपी के लोकसभा उम्मीदवार मिथलेश तिवारी, पार्टी के कई बड़े नेता स्वागत समारोह में नही होंगे शामिल, कहा 10 बर्षो में स्थानीय सांसद ने नही किया है विकास का कोई काम , जनता के सवालों का कैसे करेंगे सामना.
द जनमित्र । एस कुमार विमल
बक्सर: 2024 के लोकसभा चुनाव की तिथियो के साथ उम्मीदवारों का भी एलान हो गया है. प्रत्यासी अपने– अपने क्षेत्र में पहुँचने लगे है. इस कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के नेता मिथलेश तिवारी भी शनिवार को बक्सर में पहुचेंगे. जिसको लेकर पार्टी के अंदर का अंर्तकलह अब सड़क पर आ गया है. वर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चौबे को बेटिकट करने के बाद भी कार्यकर्ताओ का गुस्सा थमने का नाम नही ले रहा है.

यही कारण है कि बीजेपी के बक्सर लोकसभा सीट के नए उम्मीदवार मिथलेश तिवारी के पहुँचने से पहले ही पार्टी के कई बड़े नेताओं ने उनके स्वागत कार्यक्रम से दूरी बनाने का एलान किया है. पुराने कार्यकर्ताओं का आरोप है कि क्षणिक लाभ लेने के लिए कुछ लोगो खुद को बक्सर का बादशाह बताने की कोशिश में लगे है. जबकि जमीन पर जनता के बीच उनकी कोई औकात नही है. जब पहली बार अश्विनी कुमार चौबे बक्सर चुनाव लड़ने आये थे तो जो लोग आज मसीहा बन रहे है वही लोग भितरघात करने में कोई कोरकसर नही छोडा था.
कार्यकर्ताओं को नही पच रहे है नए प्रत्याशी
बीजेपी के वर्तमान जिलाध्यक्ष से लेकर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओ से जबमीडिया की टीम ने बात की तो विरोध में अधिक लोग नजर आए. वर्तमान जिलाध्यक्ष भोला सिंह की माने तो सही समय पर मीडिया को सब कुछ बताया जाएगा. वही पूर्व के कई जिलाध्यक्ष से लेकर उपाध्यक्ष एवं पुराने कार्यकर्ताओ का भी अलग अलग राय है जिससे स्पष्ट हो गया है कि मिथलेश तिवारी को लेकर बक्सर भाजपा के लोग असहज है और उनको इस बात की चिंता सता रहा है कि जैसे भागलपुर से आकर अश्विनी कुमार चौबे ने बक्सर से चुनाव जीतकर गायब रहते थे, वही हालात फिर होने वाला है.

क्या कहते है पार्टी के नेता
बीजेपी में चल रहे अंतर्कलह को लेकर , राजपूत समाज से आने वाले पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजवंश सिंह ने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे है राजद फंडिंग वाले कथाकथित भाजपा के नेता और कार्यकर्ता है. उससे पार्टी के सेहत पर कोई फर्क नही पड़ता है. वही जब उनसे पूछा गया कि राजपूत समाज और भूमिहार समाज के कई बड़े नेताओं की नराजगी को कैसे दूर करेंगे क्या उनकी पार्टी में पुनः वापसी होगी. जिसके बाद उन्होंने चुप्पी साध ली, वही राजपूत समाज से ही आने वाले पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, एवं भूमिहार समाज के निवर्तमान जिलाध्यक्ष माधुरी कुंवर को अश्विनी कुमार चौबे का विरोध करने के आरोप में बिन कारण बताए आननफानन में 8 महीने पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया जिन्हें वापस लाना भी एक बड़ी चुनौती है.
वेट एन्ड वाच की स्थिति में कई बड़े नेता
वही पार्टी के युवा कार्यकर्ता की माने तो आखिर क्यों कभी भागलपुर तो कभी गोपालगंज के प्रत्याशी को पार्टी जबरदस्ती थोप देती है क्या ऐसे नेताओं का अपने क्षेत्र में कोई जनाधार नही है कि 500 किलोमीटर दूर चुनाव लड़ने आ जाते है. बक्सर के लोग अब ऐसे नेताओं का झोला नही ढोएंगे. हम नही तो 2009 में जो स्थिति लालमुनि चौबे का हुआ था वही मिथलेश तिवारी का होगा.
कार्यकर्ताओ के भारी विरोध के कारण ही अश्विनी कुमार चौबे को नही मिली टिकट
पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की माने तो स्थानीय कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के कारण ही वर्तमान सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे को पार्टी बेटिकट कर दिया है. बक्सर के 40 हजार से अधिक कार्यकर्ताओ ने नमो ऐप से लेकर अन्य माध्यम से अश्वनी कुमार चौबे का विरोध कर अपना संदेश देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचा था जिसका परिणाम रहा की अश्विनी कुमार चौबे का टिकट कट गया.

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं में चल रहे खिंचतान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पार्टी सूत्रों की माने तो वर्तमान प्रत्यासी को भितरघात का सामना करना होगा.

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