मौत के बाद जेल से जिंदा रिहा करने का आया आदेश, आदेश को देख जेल अधीक्षक से लेकर जेल के अन्य अधिकारियो को आया पसीना 6 महीने पहले ही हत्या के आरोपी 93 वर्षीय पतिराम राय की हो चुकी है मौत.
द जनमित्र | डेस्क
बक्सरः बिहार सरकार के नए कारनामे से हर कोई है हैरान है. आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 93 वर्षीय जिस कैदी की नवम्बर 2022 में ही मौत हो चुकी है उसे जिंदा रिहा करने का आदेश जेल प्रशासन को दिया गया है जिससे जेल के अधिकारियो में हड़कमो मच गया है. दरअसल पूर्व सांसद व बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई के लिए बिहार सरकार के द्वारा जो कानून में बदलाव किया गया है उसका बक्सर सेंट्रल जेल में बंद 5 कैदियो को लाभ देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश आया है. मंगलवार को ही पांच कैदियों में से तीन कैदी को रिहा कर दिया गया जबकि रामाधार राम नामक एक कैदी ने अर्थदण्ड जमा नही किया था इसलिए उसे जेल से रिहा नही किया गया जबकि 5 वे कैदी की 6 महीने पहले ही मौत हो चुकी है.

मृत कैदी को जिंदा रिहा करने का आदेश देख अधिकारियो को आया पसीना
राज्य सरकार के द्वारा 93 वर्षीय जिस पतिराम राय, नामक कैदी को मंगलवार को जिंदा रिहा करने का आदेश दिया गया था. उस कैदी की मौत नवम्बर 2022 में ही हो चुकी है लेकिन इस बात की जानकारी सरकारी महकमे में बैठे लोगों को नही थी. जिसके कारण पूरी रात अधिकारी उस कैदी को फाइलों में ढूंढते रहे. जेल के आधिकारिक सूत्रों की माने तो पूरी रात छानबीन के बाद जब अधिकारी ने मृत कैदी के परिजनों से सम्पर्क साधा तब इस बात की जानकारी हुई कि उस कैदी की नवम्बर महीने में ही मौत हो चुकी है. जिसके बाद मरने वाले कैदियो की लिस्ट में उनका नाम देख राहत की सांस ली.

क्या कहते है अधिकारी
मृत कैदी की जानकारी देते हुए मुक्त कारागार अधीक्षक कुमारी शालिनी ने बताया कि जिले के सिमरी निवासी पतिराम राय हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे उनकी उम्र तकरीबन 93 वर्ष हो गई थी जिसके कारण पूर्व में ही कारा एवं सुधार विभाग को उनकी रिहाई के लिए पत्र लिखा गया था ऐसे में जब राज्य सरकार के द्वारा 14 वर्ष से अधिक सजा भुगत चुके कैदियों की रिहाई की घोषणा की गई तो उसमें पतिराम राय का भी नाम लिस्ट में शामिल है जबकि पिछले वर्ष के नवंबर महीने में ही उनका निधन हो चुका है.
90 से अधिक उम्र के कई कैदी जेल में बंद
कारा अधीक्षक ने बताया कि 90 साल से अधिक उम्र के आजीवन कारावास के सजावार बंदियों की संख्या 4 से 5 के बीच में है ये सभी बंदी अपनी आखरी सांस तक जेल में सजा भुगतेंगे. इनकी शारीरिक अवस्था ऐसी हो गई है कि दैनिक क्रिया कर्म में भी इन्हें परेशानी होती है न ही इन्हें आंखों से स्पष्ट दिखाई देता है और न ही इनके हाथ-पांव ठीक से काम कर रहा है. कारा एवं सुधार विभाग से ऐसे बंदियों की रिहाई के लिए समय-समय पर अनुरोध किया जाता रहता है और वहां से आदेश मिलने के बाद राष्ट्रीय पर्व तथा अन्य अवसरों पर उनकी रिहाई भी होती रही है

गौरतलब है कि जिस पतिराम राय नामक कैदी की 6 महीने पहले ही मौत हो चुकी है उसे जिंदा रिहा करने का सरकारी आदेश सिस्टम में बैठे अधिकारियों की लचर व्यवस्था का पोल खोल रहा है. सरकार जो दरियादिली बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन पर दिखाई, वही दरियादिली अपने अंतिम सांस गिन रहे 90 और 98 वर्षीय इन कैदियों पर दिखाती तो शायद अंतिम समय में भी वह अपने परिजनों को देख पाते लेकिन ऐसे कैदी किसी के लिए वोट बैंक नही है.


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