लापरवाह सिस्टम के बेपरवाह अधिकारी, बिचड़ा डालने के लिए बून्द बून्द पानी के लिए तरस रहे है किसान, न बीज मिला न नहरों में आई पानी.
द जनमित्र | सरिता कुमारी
बक्सर : जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले के किसान परेशान है. शरीर को झुलसा देने वाली इस गर्मी में लगातार अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी न तो उन्हें बीज मिल रही है और न ही नहरों में पानी आई है. किसान अपनी बेबसी को कोस रहे है और आसमान की तरह टकटकी निगाहों से देख रहे है.

1 लाख हेक्टेयर भूमि पर होता है धान की खेती
जिले के 2 लाख 22 हजार 947 किसानों के द्वारा 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान फसल की खेती की जाती है. अधिकांश किसानों के द्वारा रोहिणी नक्षत्र में ही धान का बिचड़ा डाल दिया जाता है. लेकिन अबतक मात्र 5 प्रतिशत किसान ही रोहिणी नक्षत्र में निजी नलकूप के सहारे बिचड़ा डाल पाए है और कृषि विभाग के अधिकारी एसी कमरे में बैठकर कागजी घोड़े को फाइलों में ही दौड़ा रहे है. जबकि जमीन पर न तो नहरों में पानी आई न किसानों को बीज मिला.
निजी बीज दुकानदारो का है चांदी ही चांदी
रोहिणी नक्षत्र बीत जाने के बाद भी, जिले के किसानों को अधिकारी न तो बीज उपलब्ध करा पाए है, और न ही उनको नहरों में पानी ही उपलब्ध कराया गया है. मजबूरन अन्नदाता निजी दुकानदारो से 6 हजार की जगह 9 हजार से लेकर 10 रुपये प्रति क्विंटल बीज की खरीददारी करने को मजबूर है.

अधिकारियो के साथ मौसम भी हुआ बेरहम
जिला प्रशासन के अधिकारियों के बेरहमी के साथ ही साथ आसमान से बरसती आग और पछुआ हवा की थपेड़ो ने किसानों के फौलादी हौसले को भी पस्त कर दिया है. अपने बिछड़े को बचाने के लिए दिन रात किसान खेतों की पगडंडियों पर बैठकर बिचड़े में पानी का छिड़काव करते नजर आ रहे है. जिले के किसान लालबिहारी ने बताया कि एक सप्ताह तक जिला कृषि पदाधिकारी से मिलने की कोशिश किया लेकिन गेट पर से ही कर्मी यह कहकर लौटा देते है कि साहब बिजी है. मजबूर होकर चुरामनपुर से निजी दुकान से बीज की खरीददारी की. किसानों के इस आरोप को लेकर जब जिला कृषि पदाधिकारी के सरकारी नम्बर पर फोन किया गया तो किसी ने कॉल रिसीव नही की.
गौरतलब है कि बिहार के शाहाबाद क्षेत्र को धान का कटोरा कहा जाता है. 25 मई से पहले ही जिले के किसानों को नहरों में पानी मिल जाता था. हैरानी की बात है कि 13 जून बीत जाने के बाद भी न नहरों में पानी आई और न ही इंद्र की कृपा बरसी.


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