बक्सर के वर्तमान बीजेपी सांसद ने पार्टी के वर्तमान लोकसभा प्रत्याशी के खिलाफ खोला मोर्चा, तो घुटने पर आये पार्टी के नेता. बागी नेताओं को निष्कासन से मुक्त कर कराया जा रहा है घर वापसी.
द जनमित्र | डेस्क
बक्सर : 2024 के लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम दौर में पहुँच गया है. 1 जून को सातवे एवं अंतिम चरण में बक्सर लोकसभा सीट पर मतदान होना है. जिसका परिणाम 4 जून को प्रकाशित होगा. मतदान से ठीक पहले भाजपा के वर्तमान सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पार्टी के बक्सर लोकसभा प्रत्याशी मिथलेश तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोलकर पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से लेकर जिला इकाई को घुटने पर ला दिया है. हार की डर से सहमी बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लेकर मनोज तिवारी तक को मैदान में उतार दिया है. पार्टी के प्रति कार्यकर्ताओ की उदासीनता को देख अब भाजपा अपने बागी नेताओं को घर वापसी कराना शुरू कर दिया है. जिसको लेकर पार्टी के अंदर उथलपुथल मची हुई है.
जिसपर लगा पार्टी विरोधी काम करने का इल्जाम, वही बनेंगे अब तारणहार
2024 के सियासी खेल की शुरुवात होने से पहले ही केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे को विरोध करने के आरोप में पार्टी के जिन नेताओं को पार्टी से प्रदेश इकाई ने निकाल फेका था. अब उनका घर वापसी होने लगा है. जिसको लेकर पार्टी के अंदर ही विद्रोह की स्थिति बन गई है.

पूर्व आईपीएस के साथ मिलकर भाजपा को हराने के लिए मैदान में उतरे नेता अब भाजपा के लिए मांग रहे है वोट
इस चुनावी महासंग्राम के अंतिम चरण के चुनाव प्रचार का शोर 30 घण्टे बाद थम जाएगी. भाजपा को हराने के लिए भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा के साथ भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ खुले मंच से खूब जहर उगली थी. वही राणा प्रताप अब पुनः भाजपा में वापस हो गए है. ऐसे में पार्टी को भितरघात की चिंता सता रही है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वशर्मा पहले ही निर्दलीय प्रत्याशी आनन्द मिश्रा को भाजपा के रास्ते का एक बड़ा रोड़ा बता चुके है. ऐसे में बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता भी अब असमंजस में है.
कार्यकर्ताओ के बीच आर्थिक लाभ लेने की मची होड़
1 जून को होने वाले मतदान से पहले बीजेपी नेताओं एवं कार्यकर्ताओ के बीच चल रहे खींचतान को लेकर पार्टी के ही एक बड़े नेता ने नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि कुछ ही दिन पहले बीजेपी प्रत्याशी के आवास पर जमकर मारपीट हुई. औद्योगिक थाने में मामला भी दर्ज हुआ और जमानत पर रिहा किया गया. आर्थिक लाभ लेने के लिए लोग आपस मे ही लड़ रहे है. मीडिया को मैनेज करने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाया जा रहा है. लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नही दिख रहा है. वही पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हुए मारपीट की घटना को लेकर जब औद्योगिक थाने के थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि तीन लोग शराब पीकर बक्सर गोलंबर पर हंगामा कर रहे थे जिनको गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ में पता चला कि वे लोग गोपालगंज और सिवान के रहने वाले है. उनका किसी से क्या सम्बन्ध था. इसका कोई जानकारी नही है. शराब पीने का मामला दर्ज किया गया था.

कइयों ने बदला गमछा
लोकसभा प्रत्याशी मिथलेश तिवारी को हराने के लिए भाजपा के ही पूर्व एवं कई वर्तमान नेताओं ने उनके खिलाफ साजिश कर उन्हें सियासी जाल में उलझाने की कोशिश की है. कइयों ने पाला बदल ली, तो कइयों ने गमछा बदलकर अपना दाव पेंच दिखाने में लगे हुए है. वही पार्टी के फायरब्रांड नेता अश्विनी कुमार चौबे ने भी मिथलेश तिवारी के खिलाफ खुलकर मोर्चाबंदी शुरू कर दिया है.
उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा बक्सर पूरे विश्व में अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. विश्वामित्र मुनि का यह नगरी भगवान राम एवं उनके भ्राता लक्ष्मण का भी पाठशाला बना, जहां से धर्म युद्ध का ज्ञान लेकर भगवान ने ताड़का, सुबाहू मारीच आदि राक्षसों का वध कर इस नगरी को असुरों से मुक्त कर दिया. और इस बक्सर ने ही राम को पराक्रमी राम बनाया. यह व्याघ्रसर की भूमि त्रेतायुग से ही केवल बाहरी लोगों को ही पराक्रमी बनाया है. यही कारण है कि चुनाव के दौरान कभी अधिकारी, तो कभी जज, कभी नेता, तो कभी अभिनेता बक्सर को सबसे ज्यादा सुरक्षित मानकर अपनी किस्मत आजमाने के लिए चले आते है. ऐसे में देखने वाली बात यह होगी की बक्सर पहुँचे बीजेपी नेता मिथलेश तिवारी अपने विरोधियों को हरा पाते है, या उनके हाथों चारो खाने चित होकर गोपालगंज लौट जाते है.


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